मायावती का बड़ा फैसला, राजस्थान में बसपा की प्रदेश कार्यकारिणी भंग

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए राजस्थान में बसपा की प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया। मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक इंजीनियर रामजी गौतम के साथ पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को राजस्थान में पार्टी का कामकाज देखने के लिए नियुक्त किया है। यह जानकारी बसपा के प्रदेश प्रभारी भगवान सिंह बाबा ने दी।

गौरतलब है कि 2018 में हुए राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कुल 99 सीटें मिली थी। जबकि बीजेपी को 73 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. हालांकि नतीजों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन पूर्ण बहुमत से एक सीट कम रह गई. कांग्रेस ने बीएसपी और निर्दलीय विधायकों की मदद से अपनी सरकार बनाई थी । बीएसपी के सभी 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत सरकार अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो गई है ।

बीएसपी के विधायकों द्वारा पाला बदलकर कांग्रेस के खेमे में जाने के बाद से मायावती कांग्रेस पर निशाना साधा था । मायावती ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमंद और धोखेबाज़ पार्टी होने का प्रमाण दिया है. मायावती ने इस संबंध में एक के बाद तीन ट्वीट कर कांग्रेस पर हमला बोला था । मायावती ने ट्वीट कर कहा था, ‘राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमंद और धोखेबाज़ पार्टी होने का प्रमाण दिया है । यह बीएसपी मूवमेंट के साथ विश्वासघात है, जो दोबारा तब किया गया है, जब बीएसपी वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी ।

अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लड़ने के बजाए हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने का काम करती है, जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं । कांग्रेस इस प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है और इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है ।

बीएसपी अध्यक्ष ने तीसरे ट्वीट में लिखा, ‘कांग्रेस हमेशा ही बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर और उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही । इसी कारण डॉ अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया । अति-दुःखद और शर्मनाक ।



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