राजस्थान में बीएसपी का पत्ता साफ होने पर भड़की मायावती, कहा- कांग्रेस ‘गैर-भरोसेमंद एवं धोखेबाज’ पार्टी

17 सितम्बर 2019

राजस्थान में अपने सभी छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल हो जाने पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने देश की सबसे पुरानी पार्टी पर निशाना साधा है। मायावती ने कांग्रेस को ‘गैर-भरोसेमंद एवं धोखेबाज’ पार्टी करार देते हुए उसे एससी/एसटी और ओबीसी विरोधी पार्टी बताया है। मंगलवार को ट्विटर पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बसपा के विधायकों को तोड़कर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह एक ‘गैर-भरोसेमंद एवं धोखेबाज’ पार्टी है। बसपा के साथ यह धोखा उस समय हुआ है जब वह राजस्थान में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दे रही थी।’

अपने एक अन्य ट्वीट में मायावती ने कहा, ‘अपने कटु राजनीतिक विरोधियों से लड़ने के बजाय कांग्रेस ने हमेशा उन पार्टियों को नुकसान पहुंचाया है जिन्होंने उसका समर्थन और मदद की है। इसलिए, कांग्रेस दलित, एसटी और ओबीसी विरोधी पार्टी है। वह पिछड़े वर्गों के अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं रही है।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर व उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही है।

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमन्द व धोखेबाज़ पार्टी होने का प्रमाण दिया है। यह बीएसपी मूवमेन्ट के साथ विश्वासघात है जो दोबारा तब किया गया है जब बीएसपी वहाँ कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी।

मायावती ने कहा, ‘इसी कारण अम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया। यह काफी दुःखद और शर्मनाक है।’ इस बीच, बसपा के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया दी है।

गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मायावती से इस तरह के बयान की उम्मीद की जा रही थी। बसपा विधायकों ने राज्य की स्थिति एवं लोगों की भावनाओं के बारे में विचार किया है और इसी के चलते वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने इन विधायकों पर कोई दबाव नहीं डाला था।’

गौरतलब है कि बसपा के सभी छह विधायकों ने सोमवार रात अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस के साथ करने के लिए विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी को पत्र लिखा था। विधायक राजेंद्र गुधा, जोगेंद्र सिंह अवाना, वाजिब अली, लखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद ने कहा कि वे कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी का विलय कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ‘बसपा के सभी छह विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ लगातार संपर्क में थे और आज वे कांग्रेस के साथ खड़े हो गए।’

राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं। विधानसभा में कांग्रेस के पास 100 सीटें और उसकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के पास एक सीट है। इसके अलावा कांग्रेस के पास 13 निर्दलीय विधायकों में से 12 का समर्थन हासिल है। जबकि दो सीटें रिक्त हैं। साल 2009 में गहलोत के सरकार बनाने के समय बसपा के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय गहलोत को सरकार बनाने के लिए पांच विधायकों की कमी पड़ रही थी।



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