पड़ताल : अधिकांश प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील लकड़ी के चूल्हे पर आश्रित, पूछने पर अध्यापकों के पास मिलेगा रटा-रटाया जबाब

31 अगस्त 2019

जनपद न्यूज ब्यूरो

* खाने आजमपुर में कक्षा 8 के नहीं आये एक भी बच्चे

* प्राथमिक विद्यालय खाने आज़म पुर में स्कूल के उर से गुजर है 11 हजार की लाइन

* बहाना बनाने में अध्यापक दिखे एक्सपर्ट

जिले में प्रभारी मंत्री के बदलते ही सरकारी स्कूलों को दुरुस्त करने की कवायद कागजों शुरू हो गयी है । जिलाधिकारी ने मीटिंग कर सभी को स्पष्ट निर्देश जारी किया कि स्कूलों की गुणवत्ता को ठीक करें ताकि जनपद पिछड़े जनपदों की दंश से बाहर निकल सके । साथ ही जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश दिये थे कि मिड डे मील गैस चूल्हे पर ही बनाया जाय । मगर लचर शिक्षा व्यवस्था व अधिकारियों की अनदेखी की वजह से सोनभद्र में ज्यादातर स्कूलों में खाना लकड़ी पर बन रहा है ।
मजे की बात यह है कि हर स्कूल पर अध्यापकों की अपनी अपनी कहानी है । कहीं सिलेंडर लीक कर रहा तो कहीं गैस आज ही खत्म हो गया । तो कहीं गैस का कनेक्शन ही नहीं ।
जनपद न्यूज Live के स्कूलों की स्थिति को सामने लाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है जिसमें अलग अलग क्षेत्र में जनपद न्यूज Live के रिपोर्टर स्कूल की हकीकत को आपके सामने रख रहे हैं । जनपद न्यूज Live का उद्देश्य शासन प्रशासन के उस दावे या आदेश को सामने लाना है जो कागजों पर ही दिखाया तो जाता है मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है ।
हमारे सुकृत संवाददाता मुमताज खान ने अपने क्षेत्र में कई विद्यालयों को जाकर हकीकत को देखा ।

प्राथमिक विद्यालय खाने आज़म पुर में खाना लकड़ी पर ही बनता मिला । पूछने पर बताया कि तवा बड़ा है जिसकी वजह से गैस पर दिक्कत होती है ।

इस दौरान अध्यापक ने रिपोर्टर को बताया कि इस स्कूल में निर्माणाधीन भवन के ऊपर 11हज़ार बोल्ट का बिजली का तार गुज़रा है जो हमेशा खतरा बना रहता है । प्रभारी अध्यापक ने बताया कि इस संम्बंध विभाग को लेटर लिखा गया है पर विद्युत विभाग द्वारा कोई भी संज्ञान नहीं लिया गया ।

वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय खाने आज़मपुर सुकृत का हाल बेहाल था, यहां जूनियर में कक्षा 8 के कमरे में एक भी बच्चे नहीं थे ।

पूछने पर बताया कि बच्चे क्रेशर क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य कर रहे हैं । इस स्कूल में दो टीचर थे । लेकिन जिम्मेदारी के नाम पर महज खाना पूर्ति कर रहे हैं ।

प्राथमिक विद्यालय पंपवा लोहरा में भी मिड डे मील का खाना लकड़ी पर ही बनता दिखा । पूछने पर प्रभारी ने बताया कि एमडीएम का सिलेंडर अब तक एजेंसी से नही मिला है । इसलिए मजबूरी में भोजन लकड़ी पर ही पकाया जा रहा है।

कमोबेश यही हाल प्राथमिक विद्यालय डोंगिया में देखने को मिला, जहां खाना लकड़ी पर बन रहा है । पूछने पर प्रभारी ने बताया कि जिस एजेंसी से सिलेंडर मिलना है वह गैस सिलेंडर नही दे रहा है। इसके लिए वे खुद बेहद परेशान हैं । साथ विद्यालय में पीने का स्वच्छ पेयजल और शौचालय का अभाव भी देखने को मिला ।

बहरहाल नए बेसिक मंत्री ने प्राथमिक स्कूलों को अभिभावकों की पहली पसंद बनाने का यह संकल्प कब पूरा होगा यह कहना मुश्किल है । मगर जिस हालात में सरकारी स्कूल पहुंच चुका है ऐसे में इसे सुधारने में कड़ी मशक्कत के साथ कड़ी कार्यवाही की जरूरत है ।



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