जिलाधिकारी का आदेश बेअसर, स्कूलों में टीचरों की मनमानी बदस्तूर जारी, चूल्हे पर पक रहा भोजन

28 अगस्त 2019

घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा के साथ रविन्द्र पाठक (संवाददाता)

– कहीं सिलेंडर नहीं तो कहीं लीक करने लगी सिलेंडर

– अध्यापकों में नहीं है अधिकारियों में खौफ

– ऐसा ही रहा हाल तो सोनभद्र नहीं आजाद हो सकेगा पिछड़े जनपद के दंश से

चोपन । जिलाधिकारी भले ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था देकर जनपद को पिछड़े जनपद से बाहर करने की सोच रहे हों । मगर जिलाधिकारी जिनके भरोसे पर यह सब कुछ करने की सोच रहे हैं उनकी स्थिति से आज जनपद न्यूज पर्दा उठाएगा । मंगलवार को जिलाधिकारी ने शिक्षा समिति की बैठक कर यह साफ कर दिया था कि परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील गैस पर बनेगा और कोई भी अध्यापक मुख्यालय पर मुंशीगिरी नहीं करेगा, हर अध्यापक को स्कूल में रहकर पठन पाठन को संचालित करना है ।
मगर जनपद न्यूज लाइव की टीम ने आज जिलाधिकारी के आदेश को लेकर ज़मीनी सत्यता जानने की कोशिश की तो हकीकत सामने आ गया । ज्यादातर स्कूलों में खाना लकड़ी पर बनता नजर आया और बहाना बनाया गया कि आज ही सुबह सिलेंडर खत्म हो गया तो वही कोई बताया कि सिलेंडर लीक कर रहा है ।
जनपद न्यूज की टीम ने चोपन विकास खण्ड के सिंदुरिया और वर्दियां क्षेत्र में कई स्कूलों पर जाकर स्कूल की हकीकत को देखा ।

सबसे पहले टीम ने प्राथमिक विद्यालय सिंदुरिया में जाकर देखा तो वहां भी मिड डे मील लकड़ी पर ही बनता नजर आया । इस संबंध में जब स्कूल की टीचर से पूछा गया तो उसका कहना था कि चूल्हा खराब हो गया है जिसके कारण मजबूरी में खाना लकड़ी पर बनाना पड़ रहा है ।

फिर वहां से प्राथमिक विद्यालय पड़रीपान वर्दियां पहुंचे । जहां खाना गैस चूल्हे पर बन रहा था । लेकिन मीडिया को देखकर अध्यापक का दर्द छलक पड़ा। पूछने पर बताया कि यहां पर तीन प्रमुख समस्या है सबसे बड़ी समस्या यहां पानी को लेकर है । हैंडपंप चल तो रहा है लेकिन लंबे समय से पानी गन्दा दे रहा है और प्रधान से बार-बार कहने के बाद भी उसका कोई निदान नहीं किया जा रहा है । जिसके कारण बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है और उन्हें पानी या तो घर से या फिर दूर से लाना पड़ रहा है ।

इसके अलावा अध्यापक अध्यापिका ने बताया कि सड़क भी जर्जर हो चुकी है । बरसात के दिनों में पानी बरसने पर काई जम जाता है और आने-जाने वाले बच्चे फिसल कर गिर जाते हैं । जिससे वे चोटिल भी हो जाते हैं । अंत में अध्यापिका ने बताया कि यहां की एक बड़ी समस्या यह भी है कि वायरिंग तो स्कूलों की करा दी गई मगर बिजली नदारद है । बिजली ना आने से यहां कई तरह की समस्या देखने को मिलती है।

फिर टीम प्राथमिक विद्यालय सिमरिया खाड़ पहुंची, जहां मौजूद धनशीला नामक अध्यापिका मीडिया को देखकर ही भड़क गई और आदेश मांगने लगी ।अध्यापिका का कहना था कि पहले जिलाधिकारी या बेसिक शिक्षा अधिकारी का आदेश दिखाएं, तभी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा । जब मीडिया ने उच्च अधिकारी से बात की तो उन्होंने मामले को शांत कराते हुए अध्यापक को फटकार लगाई और मीडिया की टीम से कहा कि आप अपना कार्य कर लें । जब टीम ने मिड डे मील को लेकर देखा तो वहां भी लकड़ी पर खाना बनता हुआ पाया गया ।

जब इस संबंध में अध्यापिका से पूछा गया तो बहाना बनाने लगी । उनका कहना था कि आज रसोईया ही नहीं आई है । जिसके वजह से वहां मौजूद दाई गैस सिलेंडर नहीं जला पाई । जिसके कारण आज लकड़ी पर ही खाना बन रहा है । हालांकि अध्यापिका ने इसके अलावा कई अन्य समस्याएं भी गिना दी ।अध्यापिका का कहना है कि यहां पर बिजली की भी समस्या है वायरिंग तो कर दिया गया मगर बिजली यहां अभी तक नहीं पहुंची है और रास्ते की भी बड़ी समस्या है ।

अंत में मीडिया की टीम नेवारी में भी एक प्राथमिक स्कूल को देखा जहां पर स्थिति कुछ अलग ही सामने आई ।

अध्यापक ने बताया कि यहां तो सिलेंडर ही नहीं है तो खाना कैसे गैस पर बनेगा । उसका कहना है कि इसके पूर्व जो अध्यापक तैनात थे उनके कार्यकाल में स्कूल का सिलेंडर पूर्व प्रधान ले गया जो आज तक वापस ही नहीं किया ।

बहरहाल प्रशासन लाख दावे कर ले लेकिन स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी जब तक ज़मीनी हकीकत को न परखा जाय । लेकिन प्रशासन के सामने बड़ी मजबूरी यह है कि वह जिनके भरोसे अपनी रिपोर्ट और दावे करती है वह भी अध्यापकों के बीच का ही एक सदस्य है । ऐसे में सही रिपोर्ट प्रशासन तक आ पाना मुश्किल है।



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