इस अमावस्या को कुशग्रहणी अमावश भी हैं कहा जाता,जानें


भगवान श्रीकृष्ण की आराधना को समर्पित भाद्रपद माह में आने वाली अमावस्या को भाद्रपद अमावस्या के रूप में जाना जाता है। इस अमावस्या को कुशग्रहणी अमावश भी कहा जाता है। इस अमावस्या पर धार्मिक कार्यों के लिए कुश एकत्रित की जाती है। माना जाता है कि धार्मिक कार्यों, श्राद्ध कर्म आदि में प्रयोग की जाने वाली कुश को यदि इस दिन एकत्र किया जाए तो यह वर्षभर पुण्य फलदायी होता है। कुश एकत्रित करने के कारण ही इस अमावश को कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाता है।

प्रत्येक मास में अमावस्या तिथि का अपना महत्व होता है। स्नान, दान और तर्पण के लिए अमावस्या को बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। कुशग्रहणी अमावस्या के दिन कुश हाथ में लेकर पितरों की पूजा और श्राद्ध करने से पितृ संतुष्ट और प्रसन्न होते हैं। इस दिन किए गए दान का कई गुना फल प्राप्त होता है। इस अमावश पर कुश को केवल हाथ से ही एकत्र करना चाहिये और उसकी पत्तियां पूरी होनी चाहिए। इसके आगे का भाग टूटा हुआ न हो। कुश एकत्र करने के कार्य के लिए सूर्योदय का समय उचित माना गया है। उत्तर दिशा की ओर मुख कर दाहिने हाथ से एक बार में ही कुश को निकालना चाहिए।इस दिन जरूरतमंदों को दान अवश्य करें और भूखों को भोजन कराएं।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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