तमाम यादों को छोड़कर पंचतत्व में विलीन हुए अरुण जेटली, बेटे रोहन ने दी मुखाग्नि

25 अगस्त 2019

पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली तमाम यादों को छोड़कर पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। निगमबोध घाट पर दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बेटे रोहन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेता मौजूद थे।

इससे पहले उनकी पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए भाजपा मुख्यालय में रखी गई। यहां अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जेटली ने शनिवार दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली थी। वे 66 वर्ष के थे। किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली कैंसर से पीड़ित थे।

मुखाग्नि से ठीक पहले मौसम तेजी से बदला और जोरदार बारिश होने लगी। जेटली के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बीजेपी मुख्यालय से निगम बोध घाट फूलों से सजी तोप गाड़ी में ले जाया जाया गया। पूरा माहौल ‘जेटली जी अमर रहें’ के नारों से गूंज रहा था। पार्टी कार्यकर्ता और शोकाकुल लोग सुबह से ही बीजेपी मुख्यालय के बाहर जेटली को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कतार में खड़े थे।

जेटली को याद कर मोदी भावुक हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर गए हैं। उन्होंने शनिवार को जेटली की पत्नी और बेटे से फोन पर बात की। दोनों ने मोदी से अपना विदेश दौरा रद्द न करने की अपील की। इसके बाद प्रधानमंत्री बहरीन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “मैं एक दर्द दबा कर आपके बीच खड़ा हूं। विद्यार्थीकाल से लेकर सार्वजनिक जीवन में हम मिलकर साथ चले। हर पल एक-दूसरे के साथ जुड़े रहना, साथ मिलकर जूझते रहना। जिस दोस्त के साथ यह सब किया उसने आज देश छोड़ दिया। कल्पना नहीं कर सकता कि इतनी दूर बैठा हूं और मेरा एक दोस्त चला गया। बड़ी दुविधा का पल है। लेकिन मैं एक तरफ कर्तव्य और दूसरी तरफ दोस्ती की भावना से भरा हूं। मैं दोस्त अरुण को बहरीन की धरती से श्रद्धांजलि देता हूं।”

कैसे छात्र संघ के अध्यक्ष बने

जेटली के पिता महाराजा किशन जेटली और मां रतन प्रभा थीं। जेटली के पिता भी वकील थे। जेटली ने स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल से पूरी की। 1973 में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया। अरुण जेटली 1973 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन के लिए गठित राष्ट्रीय समिति के संयोजक थे।

अरुण जेटली के पारिवारिक जीवन

24 मई 1982 को उनका विवाह संगीता से हुआ। उनका एक बेटा रोहन और बेटी सोनाली है। जेटली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना और प्रसारण, कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमृतसर लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद मोदी सरकार में उन्हें वित्त और रक्षा मंत्री बनाया गया। उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी संभाला। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया।

जेटली का सफरनामा

जन्म: 28 दिसंबर, 1952
1973 : दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से स्नातक।
1974 : दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष बने।
1975 : आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए।
1977 : दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। वकालत शुरू की। एबीवीपी के अखिल भारतीय सचिव बनाए गए।
1980 : भाजपा में शामिल हुए।
1990 : एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने। बोफोर्स केस में दलीलें दीं।
1991 : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल।
1998 : यूएन आमसभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए।
1999 : वाजपेयी सरकार में सूचना एवं प्रसारण (स्वतंत्र प्रभार) के साथ विनिवेश मंत्रालय भी संभाला।
2000 : राज्यसभा पहुंचे। इसके साथ ही कानून मंत्रालय का प्रभार भी संभाला।
2006 : पुन: राज्यसभा सांसद निर्वाचित किए गए।
2009 : राज्यसभा में विपक्ष के नेता बने। वकालत छोड़ी।
2012 : तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने।
2014 : मोदी सरकार में वित्त के साथ रक्षा मंत्रालय का प्रभार भी संभाला।
2018 : किडनी ट्रांसप्लांट हुआ।
24 अगस्त 2019 : दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन।



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