सोनभद्र नरसंहार कांड पर CM योगी ने की बड़ी कारवाही, DM व SP को हटाया, दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

04 अगस्त 2019

लखनऊ । सोनभद्र नरसंहार से जुड़े घटनाक्रम की जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के ठीक दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कड़ी कार्रवाई की है। सोनभद्र के जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक सलमान जफर ताज पाटिल को हटाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक जांच के आदेश दिये हैं। उनकी जगह एस. राजलिंगम को सोनभद्र में डीएम और प्रभाकर चौधरी को एसपी तैनात किया गया है। योगी ने इस मामले मेें पुलिस क्षेत्राधिकारी, सहायक अभिलेख अधिकारी और सहायक निबंधक कृषि सहकारी समितियां को निलंबित किया गया हैं। योगी ने बताया कि इस प्रकरण में कुल सात अराजपत्रित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है जिसमें तीन इंस्पेक्टर, एक दारोगा, दो मुख्य आरक्षी तथा एक आरक्षी शामिल है। कुल 28 दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इन मामलों की जांच के लिए डीआइजी जे. रवींद्र गौड़ की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित किया गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने पांच कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर सोनभद्र मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की। योगी ने 17 जुलाई को उभ्भा में जमीनी विवाद में दस लोगों की हत्या और उसके पीछे सुनियोजित तरीके से ग्राम सभा की जमीन हड़पे जाने का ब्यौरा दिया। योगी ने बताया कि इस मामले में पहले ही एसडीएम विजय प्रकाश, क्षेत्राधिकारी अभिषेक कुमार सिंह, इंस्पेक्टर लल्लन यादव और आरक्षी सत्यजीत यादव को निलंबित किया जा चुका है। कुल आठ गजटेड अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।योगी ने बताया कि बिहार के एक कांग्रेस एमएलसी के प्रभाव में सोनभद्र के उभ्भा गांव में 1300 बीघा से अधिक जमीन को गलत ढंग से सोसाइटी के नाम करा दिया गया। योगी ने कहा कि 17 दिसंबर 1955 को गलत आदेश पारित करने वाले तत्कालीन तहसीलदार राबर्ट्सगंज कृष्ण मालवीय के जीवित होने की संभावना नहीं है, लेकिन यदि वह जीवित हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। 1989 में तैनात परगना अधिकारी राबर्ट्सगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार जयचंद्र सिंह यदि जीवित हैं तो उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई होगी। सीओ, अभिलेख अधिकारी और सहायक निबंधक निलंबित उभ्भा में घटित जमीनी विवाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी राहुल मिश्र, सहायक अभिलेख अधिकारी सोनभद्र राजकुमार और सहायक निबंधक कृषि सहकारी समितियां, वाराणसी विजय कुमार अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। तत्कालीन उप जिलाधिकारी घोरावल विजय प्रकाश तिवारी के खिलाफ नियुक्ति विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है तथा इनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। तत्कालीन उप जिलाधिकारी घोरावल मणि कंडन, प्रभारी निरीक्षक घोरावल आशीष कुमार सिंह, शिव कुमार मिश्र, पुलिस क्षेत्राधिकारी विवेकानंद तिवारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो रहा है। पुलिस क्षेत्राधिकारी घोरावल अभिषेक सिंह, उप निरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविंद कुमार मिश्र, बीट आरक्षी सत्यजीत यादव के खिलाफ गृह विभाग ने अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद जानबूझकर यह लोग घटनास्थल पर नहीं पहुंचे थे।
विभागीय कार्रवाई के साथ ही मुकदमा दर्ज होगा पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने और उन पर गुंडा एक्ट लगाने के लिए अभिषेक सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। कोर्ट के समुचित आदेश के बिना नामांतरण आदेश के पूर्व विवादित भूमि को खाली कराने के लिए प्रधान पक्ष से 1.42 लाख रुपये जमा कराने के लिए तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार दीक्षित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही मुकदमा दर्ज होगा। पुलिस क्षेत्राधिकारी विवेकानंद तिवारी, अभिषेक कुमार सिंह, राहुल मिश्र, निरीक्षक मूलचंद चौरसिया, आशीष कुमार सिंह, शिवकुमार मिश्र, उप निरीक्षक पद्मकांत तिवारी, मुख्य आरक्षी सुधाकर यादव, मुख्य आरक्षी कन्हैया यादव व आरक्षी प्रमोद प्रताप के खिलाफ विभागीय जांच भी होगी।

दो आइएएस अफसरों की पत्नियों पर भी मुकदमा

वर्ष 1989 में सोसाइटी की भूमि जो मूलत: ग्राम सभा की थी उसे अपने नाम दर्ज कराने के लिए दो आइएएस अफसरों की पत्नियों पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। इनमें आइएएस प्रभात कुमार मिश्र की पत्नी आशा मिश्रा तथा आइएएस भानुप्रताप शर्मा की पत्नी विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने प्रक्रिया शुरू कर
दी है।

उभ्भा नरसंहार मामले में डीएम एसपी पर कार्रवाई, नए अधिकारी भेजे गए

ग्रामीणों को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर आवंटित होगी जमीन
तत्कालीन तहसीलदार रार्बट्सगंज द्वारा 17 दिसंबर, 1955 को पारित आदेश के जरिये आदर्श कृषि सहकारी समिति के नाम उभ्भा की 641 बीघा तथा ग्राम सपही की 693 बीघा, तीन बिस्वा दर्ज की गई बंजर और परती खाते की भूमि को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने के लिए सोनभद्र के डीएम को जिम्मेदारी दी गयी है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर सभी भूमि ग्राम सभा में दर्ज करने के बाद ग्रामीणों को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर आवंटित होगी।

समिति के संस्थापक सदस्यों पर भी लटकी मुकदमे की तलवार

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि 10 अक्टूबर 1952 को बिहार के कांग्रेस पार्टी के एमएलसी महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने अपने 12 नाते रिश्तेदारों के नाम से आदर्श कृषि सहकारी समिति, उभ्भा का गठन किया और करीब 1300 बीघा जमीन गलत तरीके से इसी सोसाइटी के नाम आवंटित कर दी गई। अगर 12 सदस्य जीवित होंगे तो ग्राम सभा की जमीन हड़पने के लिए उन पर भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी।

मुकदमों की जांच डीआइजी के नेतृत्व में करेगी एसआइटी

मुख्यमंत्री ने इस मामले में दर्ज सभी मुकदमों की जांच एसआइटी से कराए जाने की घोषणा की है। एसआइटी का गठन डीआइजी जे रवींद्र गौड़ की अध्यक्षता में किया गया है। इस दल में अपर पुलिस अधीक्षक अमृता मिश्रा एवं तीन पुलिस निरीक्षकों को शामिल किया गया है। एसआइटी के कार्यों की निगरानी पुलिस महानिदेशक आरपी सिंह करेंगे।

कांग्रेस और सपा को ठहराया जिम्मेदार

मुख्यमंत्री ने इस अवैध कब्जे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस की सरकार में सोनभद्र और मीरजापुर के एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि फर्जी सोसाइटी गठित करके हड़पी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 अक्टूबर, 1952 में बिहार के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और उप्र के पूर्व राज्यपाल चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह के चाचा महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और दुर्गा प्रसाद राय ने ग्राम सभा की भूमि को सोसाइटी के नाम कराया। महेश्वर प्रसाद बिहार से राज्यसभा और विधान परिषद के सदस्य थे। योगी ने बताया कि 17 जुलाई की हिंसा का मुख्य अभियुक्त ग्राम प्रधान यज्ञदत्त सपा के पूर्व विधायक रमेश चंद्र दुबे का करीबी है।

फर्जी समितियों की जांच करेगी रेणुका कुमार की कमेटी

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव राजस्व रेणुका कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है जो फर्जी समितियों द्वारा हड़पी गई जमीनों की जांच करेगी। तीन माह में सभी मामलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सोनभद्र और मीरजापुर की सभी कृषि सहकारी समितियों के राजस्व अभिलेखों के साथ मिलान कर जांच होगी। रेणुका कुमार की समिति में प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा, सीसीएफ रमेश पांडेय, देवरिया के क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रमोद कुमार गुप्ता, अपर निबंधक सहकारिता राम प्रकाश सिंह और उप निबंधक सहकारिता राजेश कुमार कुलश्रेष्ठ को शामिल किया गया है।

रसूखदारों व सरकारी मुलाजिमों ने खूब खेला ‘खेल’, CM योगी ने सार्वजनिक की रिपोर्ट

क्या है सोनभद्र नरसंहार कांड

सोनभद्र के उभ्भा गांव में 112 बीघा खेत के लिए बीते 17 जुलाई को 10 ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया गया था। लगभग चार करोड़ रुपए की कीमत की 112 बीघा जमीन के लिए ग्राम प्रधान यज्ञदत्त गुर्जर 32 ट्रैक्टर लेकर पहुंचा था। इन ट्रैक्टरों पर लगभग 60 से 70 लोग सवार थे। यह लोग अपने साथ लाठी-डंडा, भाला-बल्लम और राइफल और बंदूक लेकर आए थे। गांव में पहुंचते ही इन लोगों ने ट्रैक्टरों से खेत जोतना शुरू कर दिया। जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो यज्ञदत्त और उनके लोगों ने ग्रामीणों पर लाठी-डंडा, भाला-बल्लम के साथ ही राइफल और बंदूक से भी गोलियां चलानी शुरू कर दी। जिसमें मौके पर ही सात लोग की मौत हो गई। बाकी तीन ने अस्पताल जाते समय दम तोड़ दिया था।इस मामले में 26 आरोपितों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय में पहली पेशी के लिए लाया गया। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान सभी आरोपितों की कोर्ट में हाजिरी हुई। उसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में वापस जिला जेल पहुंचा दिया गया। आरोपितों की अगली पेशी 13 अगस्त को होगी।

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