शिवद्वार धाम में श्रावण मास के तीसरे रविवार व सोमवार को लगभग लाखों श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

4अगस्त 2019
राजकुमार गुप्ता सवांददाता 9918772542

घोरावल। श्रावण मास के तीसरे रविवार व सोमवार को एक लाख के लगभग श्रद्धालुओं के द्वारा दर्शन पूजन किये जाने की संभावना।बताते चलें कि पूरे श्रावण मास में शिवद्वार धाम में श्रद्धालुओं का आवागमन होता रहता है।श्रावण मास के चार सोमवारों में से दो सोमवार बीत गए है।आगामी सोमवार को जलाभिषेक के लिए कावरियों व श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति गत वर्षों की भांति लगभग एक लाख रहने की उम्मीद जताई गई है।जिसको लेकर शासन प्रशासन चौकन्ना हो गया है।

सुरक्षा व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर किसी भी लापरवाही को लेकर प्रशासन सतर्क है।बात अगर शिवद्वार धाम की स्थापित अद्भुत अद्वितीय प्रतिमा की करें तो शिवद्वार धाम में मुख्य मंदिर में स्थापित ग्यारवीं शताब्दी की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है।हालांकि इस मूर्ति का काल निर्धारण वैज्ञानिक प्रामाणिक नही है जिसके कारण कुछ लोग इस मूर्ति को आठवीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी के मध्य की मानते रहे हैं।शिव व शक्ति की संयुक्त यह प्रतिमा 1905 ई में खेत में हल चलाते समय मोती महतो नामक व्यक्ति को मिली थी।

जिसकी स्थापना उन्होंने एक छोटे से शिवालय का निर्माण कराकर किया गया।सन 1942 ई में पुनः मंदिर का निर्माण ने कराया गया।सन 1985 ई में जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी विष्णु देवानंद ने विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर उक्त शिव शक्ति की मूर्ति की स्थापना की।मूर्ति की विशिष्टता के चलते पूरे विश्व में अपना अलग स्थान रखती है।साथ ही जीवन्त प्रतिमा श्रद्धालुओं को बरबस आकर्षित करती है।इसके अलावा सैकड़ो मूर्तियां आज भी इस क्षेत्र में जीवंत मौजूद हैं।

शिवद्वार धाम में जलाभिषेक का क्रम करीब तीन दशक से अधिक समय से चल रही है।यहाँ 70 किमी दूर मिर्जापुर जनपद के बरिया घाट से गंगा जल व विजयगढ़ दुर्ग के रामसरोवर तालाब जल लेकर करीब पचास किमी की यात्रा कर जलाभिषेक को श्रद्धालु पहुचते हैं।यहाँ जलाभिषेक का अपना अलग महत्व है जिसे काशी से अलग नही मानते।

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