आगामी चुनाव से पहले बंगाल की जमीन मजबूत करने की दिशा में कोलकाता पहुंचे मोहन भागवत

02 अगस्त 2019

आरएसएस ने मिशन पश्चिम बंगाल पर अपना काम शुरू कर दिया है । संघ प्रमुख मोहन भागवत एक दिवसीय दौरे पर गुरुवार को कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने दक्षिण बंगाल के नवनियुक्त प्रांत प्रचारक जलधर महतो समेत अन्य प्रचारकों के साथ के‍शव भवन के बंद कमरे में चार घंटे मंथन किया । इस बैठक में संघ प्रमुख ने बंगाल में आरएसएस की शाखाओं के विस्तार और हिंदू संगठनों को मजबूत करने पर जोर दिया ।

हाल ही में पश्चिम बंगाल के प्रांत प्रमुख के पद से विद्युत मुखर्जी को विभिन्न आरोपों के चलते हटा दिया गया है । विद्युत मुखर्जी की जगह जलधर महतो को संघ की बंगाल में जिम्मेदारी सौंपी गई है। 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संघ प्रमुख ने बंगाल में आरएसएस के प्रचार-प्रसार और शाखाओं को बढ़ाने को लेकर विचार-विमर्श किया ।

इसके साथ संघ प्रमुख के मंथन के बाद माना जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी संगठन में भी बड़ा बदलाव किया जा सकता है । मौजूदा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष सांसद चुने गए हैं, ऐसे में बंगाल की कमान अब किसी अन्य को भी सौंपी जा सकती है ।

सूत्रों की माने तो सं‍घ प्रमुख ने बंगाल में शाखाओं की संख्या में और तेजी से वृद्धि करने का मंत्र दिया है । बंगाल में आरएसएस के 2300 मंडल हैं । 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले प्रत्येक मंडल में दो शाखाएं, साप्ताहिक बैठक ‘मिलन’ और मासिक बैठक ‘मंडली’ करने का लक्ष्य रखा गया है । साथ ही भागवत ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए संघ के लोगों को घर-घर पर जाकर उनके साथ भोजन करने और उनके दुख दर्द में शामिल होने का एलान का संदेश दिया है ।

सूत्रों के मुताबिक देश भर में संघ को और भी मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन आरएसएस इस समय उन राज्यों पर ज्यादा जोर दे रहा है, जहां शाखाओं की संख्या कम है । ऐसे राज्यों में संघ ने शाखाएं बढ़ाने का फैसला लिया है।

बता दें कि फिलहाल बंगाल में आरएसएस की कुल 2200 शाखाएं हैं, जिन्हें ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है । पश्चिम बंगाल और केरल के साथ पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में विस्तार पर जोर है, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम आदि शामिल हैं. माना जा रहा है कि इन राज्यों में संघ अपनी पैठ बनाने के लिए स्कूली स्तर से ही बच्चों में संघ की विचारधारा पैदा करने के लिए वहां नये स्कूल भी खोले जा सकते हैं । इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों की संख्या में इजाफा किया जा सकता है ।



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