आइए जानते हैं,आखिर कितने तरह के होते हैं बृहस्पति के राजयोग,इनका क्या हैं महत्व

नवग्रहों में बृहस्पति को गुरु और मंत्रणा का कारक माना जाता है. बृहस्पति सबसे ज्यादा शुभ और शक्तिशाली ग्रह माना जाता है. बृहस्पति का मात्र एक राजयोग भी व्यक्ति को शीर्ष पर पहुंचा सकता है. बृहस्पति अनुकूल होने पर जितना शुभ होता है उतना ही प्रतिकूल होने पर इसके परिणाम भयंकर अशुभ हो जाते हैं. पांच तत्वों में आकाश तत्व का अधिपति होने के कारण इसका प्रभाव बहुत ही व्यापक और विराट होता है. आइए जानते हैं आखिर कितने तरह के होते हैं बृहस्पति के राजयोग.

पहला राजयोग – केंद्र स्थान में बृहस्पति:
– बृहस्पति केंद्र में काफी मजबूत माना जाता है

– उसमे भी अगर लग्न में हो तो अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है

– यह अकेला कुंडली के तमाम दोषों को नष्ट कर देता है

– व्यक्ति की आयु लम्बी कर देता है और ज्ञानी बना देता है

– परन्तु मकर राशि में बैठा बृहस्पति यह शुभ प्रभाव नहीं देता

– ऐसा बृहस्पति होने पर धर्मस्थानों पर जरूर जाएँ

– साथ ही अगर नियमित रूप से तिलक लगा सकें तो और भी उत्तम होगा

दूसरा राजयोग – गजकेसरी योग:
– अगर बृहस्पति और चन्द्रमा एक दूसरे से केंद्र में हों तो गजकेसरी योग बनता है

– यह योग कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न में विशेष प्रभावशाली होता है

– इस योग वाला व्यक्ति शासन और राजनीति में विशेष सफल होता है

– ऐसे लोग जीवन में जिस भी क्षेत्र में जाते हैं, खूब सफल होते हैं

– इस योग के होने पर व्यक्ति को शिव जी की उपासना करनी चाहिए

– साथ ही अगर संभव हो पीला पुखराज धारण करना चाहिए

तीसरा राजयोग – हंस योग:
– बृहस्पति से बनने वाला पञ्चमहापुरुष योग है

– बृहस्पति अगर कर्क, धनु या मीन राशि में हो तो यह योग बन जाता है

– परन्तु यह योग तभी काम करता है जब केंद्र या त्रिकोण में हो

– यह योग व्यक्ति को महान बना देता है

– इस योग के होने पर व्यक्ति सम्मान पाता ही है

– अगर यह योग है तो जीवन में सात्विक रहना चाहिए

– जहाँ तक हो सके व्यक्ति को शुभ और धर्म कार्य करते रहना चाहिए



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