लंबी बहस के बाद तीन तलाक बिल को मंजूरी, विपक्ष ने किया वॉक आउट

25 जुलाई 2019

लोकसभा ने गुरुवार को लंबी बहस के बाद तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी। बिल में संशोधन के लिए लाए गए विपक्षी सांसदों के प्रस्ताव गिर गए और यह बिल पारित हुआ। 303 सदस्यों ने बिल के समर्थन में वोट किया जबकि विरोध में 82 वोट पड़े। अब सरकार की कोशिश इसे इसी सत्र में राज्यसभा में पास कराने की होगी। मौजूदा सत्र को भी बढ़ा दिया गया है जो अब 7 अगस्त तक चलेगा। संशोधनों और बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस सांसदों ने वॉक आउट किया। टीएमसी और जेडीयू ने भी वॉक आउट किया।

तीन तलाक बिल पर किसने क्या कहा?

लोकसभा में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा की तरफ से यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं है। हम साफ करना चाहते हैं कि हमारा रुख स्पष्ट है। तीन तलाक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के फैसले का सबसे पहले कांग्रेस ने स्वागत किया था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध सिर्फ तीन तलाक को इसे फौजदारी मामला बनाने से है, जबकि यह दीवानी मामला है। गोगोई ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि लाखों हिंदू महिलाओं को उनके पतियों ने छोड़ दिया है, उनकी चिंता क्यों नहीं की जा रही है?

इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए और पतियों से अलग रहने को मजबूर सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक कानून बनना चाहिए।

उन्होंने इस विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ करार देते हुए दावा किया कि यह विधेयक मुसलमानों की बर्बादी के लिए लाया गया है।

जावेद ने सवाल किया कि जब मुस्लिम पुरुष जेल में होगा तो पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता कौन देगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार ने पहले मुस्लिम पुरुषों को आतंकवाद के नाम पर जेल में डाला, फिर भीड़ द्वारा हिंसा के जरिए निशाना बनाया और अब इस प्रस्तावित कानून के जरिए उनको जेल में डालना चाहती है।

कांग्रेस सांसद ने कि अगर सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम महिलाओं के हित के बारे में इतना सोचती है तो उसके 303 सांसदों में एक भी मुस्लिम महिला क्यों नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि सरकार को भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार परिवारों की चिंता क्यों नहीं हो रही है? जावेद ने आरोप लगाया कि इस सरकार में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।

इसके पहले बहस के दौरान कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बिल का बचाव करते हुए इसे लैंगिक समानता तथा न्याय के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि अगस्त, 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को खारिज किए जाने के बावजूद अभी भी यह प्रथा जारी है।

हालांकि सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के एक अहम घटक जनता दल (यूनाइटेड) समेत कई अन्य दलों ने बिल का जोरदार विरोध किया। वहीं, सपा सदस्य आजम खान की आसन के प्रति की गई ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी पर जबर्दस्त हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने उनसे माफी मांगने की मांग की। लेकिन आजम अड़े रहे और कहा कि यदि उन्होंने कुछ ही आपत्तिजनक कहा है तो वह ‘तत्काल’ इस्तीफा दे देंगे।

कानून मंत्री ने कहा कि जनवरी, 2017 से देशभर में तत्काल तीन तलाक (तलाक–ए– बिद्दत) के 574 मामले हुए हैं, इनमें से 300 से ज्यादा तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया में रिपोर्ट हुए हैं। मंत्री ने कहा– ‘ऐसे में हमें क्या करना चाहिए? क्या हम मुस्लिम महिलाओं का शोषण जारी रहने दें?’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तथा मलेशिया समेत 20 मुस्लिम देशों ने तत्काल तीन तलाक को प्रतिबंधित कर दिया है तो फिर धर्मनिरपेक्ष देश भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता? उन्होंने कहा– ‘बगैर धार्मिक भेदभाव के लैंगिक समानता हमारे संविधान का मूल दर्शन है। हम महिलाओं को सम्मान तथा न्याय देना चाहते हैं।’ उन्होंने सांसदों से इस बिल को राजनीति या धर्म के नजरिए से नहीं देखने की अपील की।


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