मुम्बई इमारत हादसे में 7 की मौत, कई के दबे होने की आशंका, रेस्क्यू जारी

16 जुलाई 2019

मुंबई के डोंगरी में मंगलवार को एक चार मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि इमारत के मलबे में 40-50 लोगों के दबे होने की आशंका है। 7 घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया है। घायलों को जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक 15 परिवार अभी भी मलबे में दबे हैं और उन्हें निकालने की कोशिश जारी है। यह बिल्डिंग 100 साल पुरानी है। हमारा पूरा फोकस मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने पर है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत 80-100 साल पुरानी है। इमारत काफी खस्ताहाल में थी। इलाके में बारिश हुई। बारिश के बाद तेज हवा चल रही थी। उसी वक्त तेज आवाज आई। जब बाहर निकलकर देखा तो इमारत गिर गई थी।

बीएमसी के मुताबिक, डोंगरी के एमए सारंग रोड पर स्थित केसरबाई बिल्डिंग का आधा हिस्सा गिर गया। स्थानीय लोग भी रेस्क्यू अभियान में मदद कर रहे हैं।संकरी गली होने की वजह से राहत और बचाव कार्य में मुश्किल आ रही है। प्रशासन ने आसपास की इमारतों को खाली करा दिया है।

मौके पर एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और ऐंबुलेंस मौजूद हैं। इमारत संकरी गली में होने के चलते राहत कार्य में परेशानी आ रही है। मौके पर एनडीआरएफ की टीम बुलाई है। गली में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी नहीं जा पा रही है। ये टीमें पैदल ही घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य में जुट गई हैं। डोंगरी हादसे पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि जो बिल्डिंग गिरी है, उसमें करीब 15 परिवारों के फंसे होने की आशंका है। म्हाडा के नियमानुसार लोगों ने रीडिवेलपमेंट के लिए एक डिवेलपर को अपॉइंट किया था। उसने डिवेलपमेंट क्यों नहीं किया? इसकी जांच कराई जाएगी। फिलहाल अभी पीड़ित परिवारों को सुरक्षित रेस्क्यू कराने पर हमारा जोर है। जो मुआवजा सरकार देती है, वह पीड़ित परिवारों को दिया जाएगा।

पीएम मोदी ने पीड़ित परिवारों से जताई संवेदना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। PMO के ट्वीट के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा, ‘मुंबई के डोंगरी में इमारत ढहने की घटना पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपनों को खो दिया है। मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। महाराष्ट्र सरकार, NDRF और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव अभियानों में जुटे हुए हैं।’


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