एक जुलाई से जिले में चलेगा विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान को सफल बनाने हेतु डीएम ने अधिकारियों के साथ की बैठक

● संचारी रोग नियंयण अभियान को सफल बनाने हेतु सभी विभाग आपस में समन्वय बनाकर करें काम – जिलाधिकारी

● संचारी रोग नियंत्रण अभियान में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के विरूद्ध की जायेगी कार्यवाही – जिलाधिकारी

सोनभद्र । संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान को सफल बनाने हेतु जिलाधिकारी चन्द्र विजय सिंह ने आज कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान दिनांक 1 जुलाई से 31 जुलाई तक एवं दस्तक अभियान 16 जुलाई से 31 जुलाई तक चलाया जायेगा। इस अभियान के अन्तर्गत आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्रत्येक मकान पर क्षय रोग से संभावित रोगियों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करेंगी तथा क्षय रोग के लक्षणों वाले किसी व्यक्ति की सूचना प्राप्त होने पर उसके सम्बन्ध में ब्लाक मुख्यालय पर सूचना उपलब्ध करायेंगी। इस दौरान बुखार रोगियों की संख्या आईएलआई (इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस) रोगियों की एवं क्षय रोगियों के लक्षण, कुपोषित बच्चों की सूची तथा ऐसे मकानों की सूची जहां मच्छरों के प्रजनन होना पाया जाये। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग संचारी रोगों तथा दिमांगी सम्बन्धी रोकथाम एवं नियंत्रण गतिविधियों हेतु अभियान चलाया जायेगा। इस दौरान नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत एंव ग्राम पंचायतों में जिला पंचायत राज अधिकारी एवं अधिशासी अधिकारी नगरी क्षेत्रों में वातावरणीय तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के उपायों, खुले में शौच न करने, शुद्ध पेयजल के प्रयोग करने हेतु जागरूकता अभियान संचालित करें। खुले नालियों के ढकने के साथ ही कचरों की सफाई की व्यवस्था भी की जाये। हैण्डपम्पों के पाइप को चारों ओर से कंकरीट से बन्द कराया जाये, हैण्डपम्पों के पास अपशिष्ट जल निकासी के लिए सोक-पिट का निर्माण कराया जाये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा फण्ड से एन्टीलार्वा का छिड़काव भी कराना सुनिश्चित किया जाये, जलाशयों एवं नालियों की नियमित सफाई भी सुनिश्चित किया जाये। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा इस अभियान के तहत आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किया जाये।

इस दौरान आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के द्वारा अपने क्षेत्र के कुपोषित तथा अति कुपोषित बच्चों की सूची बनाकर उनको निर्धारित मात्रा में पोषाहार उपलब्ध कराया जाना तथा आवश्यकता होने पर पोषण पुनर्वास केन्द्रों पर उपचार तथा पोषण पुनर्वास के लिए भेजना। एईएस/ईई रोग से विकलांग कुपोषित बच्चों को अति कुपोषित बच्चों की भाॅति पुष्टाहार/टेक-होम राशन उपलब्ध कराना। संचार रोगों तथा दिमांगी बुखार के लिए जन साधारण अभियान तथा दस्तक अभियान में स्थानीय एएनएम तथा आशा कार्यकत्रियों को सहयोग करते हुए कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग प्रदान करना आदि महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला गया।

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