खाद वितरण में अनियमितता से किसान परेशान

आर के (संवाददाता)

-लैंपस सचिव पर मनमानी करने का आरोप

-एक सप्ताह से किसान लगा रहे लैंपस का चक्कर

सागोबांध। भारत को वैसे तो किसानों का देश कहा जाता है। यहां आबादी का करीब 73 फ़ीसदी लोग कृषि करके अपने जीवन यापन करते हैं। आने वाली हर एक सरकार कहती है कि हमारी सरकार किसानों पिछड़े गरीबों दलितों की सरकार है मगर यह केवल चुनावी लॉलीपॉप रहता है। किसान लगभग हर एक सरकार में ठगे जा रहे हैं। उनको न कृषि करने के लिए खाद बीज मिल रहा है और नहीं कृषि उपज का उचित मूल्य मिल पा रहा है। पिछले साल कोरोना महामारी में भी किसान जान जोखिम में डालकर खाद लेने को विवश थे वहीं इस वर्ष भी पिछले साल की दशा लैंपस पर भारी भीड़ को देखकर कहा जा सकता है।

म्योरपुर क्षेत्र के छत्तीसगढ़ सीमा से सटे 7 गांव के बीच सागोबांध लैंपस है। यहां एक सप्ताह पहले 200 बोरी यूरिया के दूसरी खेप आयी है। मगर लैंपस सचिव के द्वारा हमेशा मनमानी किया जाता है।

गोदाम में यूरिया खाद के बावजूद भी वितरण नहीं कर रहे हैं। किसान प्रतिदिन लैंपस का चक्कर लगाने को विवश हैं। कभी-कभी लैंपस सचिव द्वारा चुनिंदा 10-20 लोगों को यूरिया खाद देकर शटर गिराकर अपने घर चले जाते हैं। सैकड़ों किसान सुबह से आकर शाम को बगैर यूरिया खाद लिए चले जाते हैं। कुछ ग्रामीणों की माने तो लैंपस सचिव जानबूझकर किसानों को परेशान करते हैं जिससे सरकार की छवि धूमिल हो सके। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग किया है कि सागोबांध लैंपस में पर्याप्त यूरिया स्टॉक किया जाए और प्रशासन की देखरेख में यूरिया खाद का वितरण किया जाए।

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