आखिर कब बंद होगी स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, गुरमुरा में फिर सामने आयी बड़ी लापरवाही, पढ़ें पूरी खबर

संजय केसरी/अर्जुन मौर्या (संवाददाता)

डाला । जनपद न्यूज live के खबर का बड़ा असर देखने को मिला । पिछले चार महीने से वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए भटक रहे आदिवासी लोगों की खबर चलने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है । आज आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग गुरमुरा स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सिनेशन का कैम्प लगवा दिया । बिना किसी सूचना के आयोजित कैम्प में लोगों के न पहुंचने पर स्वास्थ्य कर्मी टेंशन में दिखने लगे लेकिन जब कुछ लोग दूसरे डोज के टीकाकरण के लिए पहुंचे तो पता चला कि पहले डोज के लिए ही टीका भेजा गया है । जिसके बाद वे वापस चले गए । जब जनपद न्यूज संवाददाता ने पहुंचकर वहां पड़ताल की तो पता चला कि दूसरे डोज के लिए चार महीने बाद भी कोई व्यवस्था नहीं हुई है सिर्फ पहले डोज के लोगों को ही टीका लगेगा । लेकिन किस्मत देखिये जब पहले डोज के लिए चंद लोग पहुंचे तो बताया गया कि गलती से कोवैक्सिन का दूसरा डोज आ गया हैं । ऐसे में उस समय तक न तो पहले डोज वाले को टीका लग पाया और न दूसरे डोज वाले को, क्योंकि दूसरे डोज वाले को पहले कोविशिल्ड लगाया गया था ।

जब चोपन अधीक्षक को मीडिया के पहुंचने की जानकारी हुई तो आनन-फानन में दूसरे डोज का टीका कोविशिल्ड गुरमुरा केंद्र पर भेजा गया । जिसके बाद कोविशिल्ड ही पहले व दूसरे डोज वाले को लगाया गया ।

आपको बतादें कि विकास खण्ड चोपन क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोटा का गुरमुरा इलाका काफी पिछड़ा व आदिवासी बाहुल्य माना जाता है। शुरुआत में कोविड वैक्सीन को लेकर आदिवासी बेहद डरे व सहमे हुए थे। लेकिन काफी समझाने-बुझाने के बाद वे स्थानीय अस्पताल में वैक्सीन लगाने को तैयार हुए ।
जिसके बाद मार्च में कैम्प के माध्यम से गुरमुरा अस्पताल पर लगभग 900 लोगों को कोविशिल्ड लगाया गया ।

पहले कैम्प लगे लगभग चार महीने से अधिक का समय बीत गया दूसरी डोज के लिए दोबारा गुरमुरा में कैम्प नहीं लगा था। जिसका लोग इंतजार कर रहे थे ।लेकिन खबर चलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और आज बुधवार को 10 बजे से नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुरमुरा में वेक्सिनेशन का कैम्प लगाया गया

शाम तक मात्र 39 लोगों का ही वैक्सिनेशन लगाया गया जिसमे 34 लोगों को पहला डोज और 5 लोगों को दूसरा डोज लग पाया

अब सवाल यह उठता है कि टीकाकरण को लेकर जिलाधिकारी जितने संजीदा दिखते हैं स्वास्थ्य महकमा उतना क्यों नहीं है और आखिर कब तक आंकड़ों की बाजीगरी में उलझे रहेंगे ।

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