क्या गांव में युवाओं को लुभाने का सीएम योगी का दांव उल्टा पड़ गया, क्यों हो रहा विरोध, पढ़ें पूरी खबर

आनंद कुमार चौबे/रमेश यादव (संवाददाता)

फाइल फोटो

सोनभद्र । अगले साल 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव होना है और इसके लिए हर दल अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है । कोई ब्राह्मण कार्ड खेलना चाहता है तो कोई बेरोजगार युवाओं को लुभाने की कोशिशों में जुटा हुआ है ।

योगी सरकार द्वारा यूपी के सभी ग्राम पंचायतों में बम्पर भर्ती निकाली गई हैं। प्रदेश में जितनी पंचायतें हैं उनमें उतने ही पंचायत सहायक या डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति की जाएगी । चुनाव नजदीक है इसलिए हर काम की समय सीमा तय कर दी गयी है ।
पंचायत सहायक या डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति भी 40 दिनों में पूरा करने का निर्देश सभी अधिकारियों को दे दिया गया है ।

इस भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित करने की सूचना 30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच जारी होना है लेकिन उंसके पहले विरोध का स्वर फूटने लगा है ।

दरअसल योगी सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था लागू की है वह युवाओं को रास नहीं आ रहा है । क्योंकि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का वही नियम लागू होगा जो पंचायत चुनाव में उस ग्राम पंचायत के लिए लागू था ।

चुनाव के पहले बेरोजगार युवाओं को लुभाने का योगी सरकार यह दांव अब उल्टा पड़ने लगा है ।
गांव के बेरोजगार युवाओं का कहना है कि यह भर्ती सिर्फ चुनावी भर्ती है और योगी सरकार युवाओं को आपस में बांटने का काम कर रही है । उनका कहना है कि इस आरक्षण व्यवस्था से योग्य युवा वंचित रह जाएंगे ।

वहीं कई युवाओं का कहना है कि इस भर्ती में सबसे बड़ी कमी डाटा एंट्री को लेकर है । यह पद पंचायत सहायक या डाटा एंट्री की है लेकिन कम्प्यूटर का कोई भी ज्ञान नहीं मांगा गया ।

कुल मिलाकर चुनाव के पहले योगी सरकार बेरोजगारी के मुद्दे पर खरा उतरना चाहती है। क्योंकि 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने युवाओं को हर साल नौकरी देने की बात कही थी लेकिन अब जब चुनाव का बिगुल बज चुका है और प्रदेश में बेरोजगारी का मुद्दा खड़ा है तो योगी सरकार इस मुद्दे पर खरा उतरना चाहती है, मगर अब उसकी आरक्षण नीति ही उसके गले की फांस बन गयी है।

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