बरसात और बेइंतजामी ने किया जनजीवन अस्त-व्यस्त

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका परिषद की सड़कों तथा आस-पास के गांवों मे भारी जलभराव

● समाजसेवी गिरीश पाण्डेय ने रहवासियों की मदद के लिए जिलाधिकारी से की बात

समाजसेवी गिरीश पांडेय ने की नगर पालिका द्वारा गत चार वर्षों में कराए गए नाली निर्माण के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सोनभद्र । शुक्रवार शाम से हो रही बरसात अब तक जारी है। भारी बारिश के कारण आज रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका परिषद की सड़क पर जहां पानी भरने से लोग परेशानी का सामना कर रहे थे तो वहीं आस-पास के गांव बढ़ौली तथा उरमौरा गांव की सड़क पर भी जलभराव का असर देखने को मिला।

नाली तथा बरसात का पानी लोगों के घरों मे जाने लगा तो बढ़ौली निवासी संतोष तिवारी, सोनू पाण्डेय ने सोशल मिडिया पर जलभराव की तस्वीर वायरल कर मदद की अपील की।

संतोष तिवारी और उरमौरा के निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य जलाल हैदर खान ने पूर्वांचल नव निर्माण मंच के उपाध्यक्ष गिरीश पाण्डेय को गांव मे जलभराव से जनजीवन प्रभावित होने की जानकारी दी। जिसे गंभीरता से लेते हुए गिरीश पाण्डेय ने जिलाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह को फोन पर नगर पालिका परिषद की दुर्व्यवस्थाओं के कारण सड़कों पर पानी भरने तथा बढ़ौली व उरमौरा गांव मे भारी जलभराव की जानकारी देते हुए जल निकासी सुनिश्चित कराने की मांग की।

मंच के नेता गिरीश पाण्डेय ने हो रहे जलभराव के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पिछले चार साल के कार्यकाल मे नाली निर्माण तथा जलभराव से छुटकारा देने के लिए करोड़ों रुपए नगर पालिका परिषद में खर्च करने के बावजूद हालात आज बेहद खराब हैं।

नगर पालिका से बाहर जाने वाली सभी नालियों का निर्माण अधूरा ही है और आवंटित धन का बंदरबांट कर लिया गया है। जिसका खामियाजा आज नगरवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

गिरीश पाण्डेय ने गांव में भी कराये गये कामों में घोर अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में भी विकास विभाग केवल विकास कार्य की खानापूर्ति करता रहा है, जिसका दुष्परिणाम है कि आज थोड़ी सी बरसात में जिला मुख्यालय से सटे गांव पानी की चपेट में हैं।

गिरीश पाण्डेय ने जिलाधिकारी से नगर पालिका परिषद में कराये गये नाली निर्माण तथा जल निकासी के सभी चार साल के कामों की उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर कराने की मांग की।

गिरीश पाण्डेय ने बताया कि अभी पिछले साल पच्चीस करोड़ से अधिक रुपये केवल नगरपालिका परिषद से गंगा पानी बाहर निकालने के लिए आवंटित हुआ था, जिसका एक रुपया भी नगर में खर्च किया नहीं दिखता है।

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