परम हंस आश्रम में धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा का पर्व

संजीव पांडे /विवेक मिश्रा (संवददाता

राजगढ़। सत्संग के दौरान संतो ने परम हंस आश्रम में महात्मा जन बताए कि गुरुमहाराज इस समय बरचर आश्रम बिराजमान हैं लेकिन उनकी कृपा सबके ऊपर है श्रद्धा भाव से लगने की जरूरत है ज्यों ज्यों उनके बताए हुवे मार्ग पर चलेंगे तो रास्ता तय होता जायेगा और संसार सागर से पार होते जायेंगे गुरुपूर्णिमा का मतलब ही यही होता है की गुरु जो पूर्ण हो चुके हैं उनके द्वारा ही लोगों का कल्याण होता है गु मतलब अंधकार रु मतलब प्रकाश संसार एक अंधकार मय है भगवान ही प्रकाश स्वरूप हैं जो अंधकार से प्रकाश की तरफ ले चलाएं वही गुरु कल्याणकारी होते हैं।

ये बातें आश्रम के संत श्री लाले महाराज जी बताए और यह भी बताएं की ऐसे विशुद्ध संत तभी मिलते हैं जब भगवान की कृपा हो और अपने आराध्य गुरुमहराज की महिमा बताते हुवे वो बताए की उनके दर्शन मात्र से कल्याण होता है और यथार्थ गीता के विषय में भी बताए की गीता के पद चिन्हों पे कोई भी चलेंगे तो सामाजिक भ्रांतियों से छुटकारा मिलेगा धर्म कर्म यज्ञ वर्ण और सभी संकावों का समाधान पाने के लिए यथार्थ गीता का अनुसरण करना होगा अध्ययन चिंतन करना होगा और एक ईश्वर के नाम का जप करना होगा ॐ या राम तभी कल्याण होगा तभी गुरुपूर्णिमा को सार्थक कर पाएंगे सत्संग के दौरां श्री नारद महाराज जी श्री बिरतबिज्ञा नंद जी श्री लाले महाराज जी श्री सोहम महाराज जी श्री बच्चा नंद जी श्री कृष्णानंद जी महाराज ने परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ तथा परमहंस आश्रम कैलाशपुरी परसौना के महात्मा गण गुरु पूर्णिमा पावन पर्व पर भक्तों को गुरु की महत्ता विस्तार पूर्वक बताते हुए भक्तों को आशीर्वचन प्रदान किए।

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