सांसद ने सीएमओ पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, शासन को लिखा पत्र

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । यूपी सरकार भले ही पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अधिकारियों के कार्य से सत्ताधारी दल के लोकसभा सांसद भी असंतुष्ट हैं। राबर्ट्सगंज लोकसभा से भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) के सांसद पकौड़ी लाल कोल ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नेम सिंह के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया। सांसद ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उ0प्र0 शासन को पत्र लिखकर बीजेपी विधायक ने मुख्य चिकित्साधिकारी पर भ्रष्टाचार सहित कई संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोनभद्र के मुख्य चिकित्साधिकारी को सोनभद्र से अन्यत्र हटाते हुए उनके कार्यकाल में हुए वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने का अनुरोध किया है।

सांसद ने पत्र में सीएमओ डॉ0 नेम सिंह पर कई गम्भीर आरोप लगाते हुए लिखा हैं कि वर्तमान में तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारी का व्यवहार न तो जनता से ठीक है और न ही जनपद में तैनात चिकित्सकों से। यहाँ तक की जनप्रतिनिधियों की बात पर भी वह ध्यान नहीं देते हैं। सांसद ने लिखा है कि व्यक्तिगत तौर पर मेरे द्वारा मांगी गई सूचनाओं को भी उनके द्वारा नहीं दिया जाता है। मेरे कार्यालय द्वारा पत्र संख्या 1369/एमपीएलएस/2021 दिनांक 24 जुलाई 2021 को माँगी गई 9 बिंदुओं की सूचना को अब तक उनके द्वारा उपलब्ध न कराया जाना जनप्रतिनिधियों के प्रति उनके उदासीनता पूर्ण रवैए को दर्शाता है। उन्होंने पत्र में अवगत कराया है कि इनके कार्यकाल के दौरान सरकारी कोष से ऑन लाइन फ्रॉड के जरिये कई लाख रुपये निकाल लिए गए हैं, जिसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को इनके द्वारा बचाया जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि सीएमओ के उदासीनता पूर्ण रवैये के कारण सोनभद्र के पहाड़ी व जंगली इलाकों में मच्छरों से बचाव के लिए डीडीटी का जो छिड़काव होता था वह भी ठीक से नहीं हो पाया है। डीडीटी पाउडर की आपूर्ति तो ली गई परन्तु समय से उसका छिड़काव न हो पाने के कारण सैकड़ों बोरी डीडीटी एक्सपायर हो गई। इस बात पर पर्दा डालने व जिम्मेदार कर्मचारियों को बचाने के लिए इनके द्वारा विभागीय जांच के नाम पर केवल कोरम पूरा किया जा रहा है। सांसद ने अपने पत्र में सीएमओ को जनपद से अन्यत्र हटाते हुए इनके कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए शासन से अनुरोध किया है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सांसद द्वारा सीएमओ पर लगाए गए इस प्रकार के गम्भीर आरोपों की उच्चस्तरीय जाँच होती है या यह पत्र भी फाइलों में दबकर धूल फांकता रह जाता है।

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