पतिव्रता धर्म का पालन करने पर मिलते है ईश्वर

अनीता अग्रहरि (संवाददाता)

धीना। चिरईगांव में ग्रामीणों के सहयोग से चातुर्मास यज्ञ के सत्रहवें दिन शुक्रवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुन्दरराज महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया।कथा में स्त्री के पतिव्रता धर्म के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा किया।
कथावाचक सुन्दरराज महाराज ने कहा कि देवताओं की तपोस्थली से जन्म लेने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है।इस धरती पर देवता भी स्त्री के गर्भ से जन्म लेना चाहते है।स्त्रियां(माता)पतिव्रता धर्म का पालन कर ईश्वर को प्राप्त करती है।पतिव्रता धर्म का पालन केवल भारत मे ही किया जाता है।पतिव्रता धर्म के पालन में अनुसूइया का प्रथम स्थान आता है।एक बार सरस्वती, लक्ष्मी व दुर्गा माता में विवाद छिड़ा की सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता कौन है।इस परीक्षा में अनुसूइया सफल हो जाती है।आज कलयुग में पतिव्रता स्त्री को खोजना पड़ रहा है।कथा का रसपान करने वालों में संतोष सिंह,संत विलास सिंह, मृत्युंजय सिंह नागवंशी, शिवबच्चन सिंह, उपेंद्र सिंह, उमा,कोमल सिंह, जागृति, शकुंतला, पिंकी, वैशाली, प्रगति सिंह, आरती, नीलम आदि रहे।

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