पूर्व राजकीय सीमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों ने पेंशन भुगतान के लिए मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

अरविंद चौबे (संवाददाता)

मारकुंडी । उत्तर प्रदेश राजकीय सीमेंट चुर्क गुरमा, डाला एवं चुनार शासन के गलत नितियों के कारण सन् 2002 में बन्द कर प्राईवेट कम्पनी के हाथों बेच दिया गया था । जो सेवानिवृत्त/छंटनी शुदा लगभग 60 कर्मचारियों को आज तक पेंशन के भुगतान न होने से उनके समस्त परिवार शारिरिक मानसिक आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पूर्व राजकीय सीमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पेंशन भुगतान के लिए न्याय की गुहार लगाई है। उक्त सम्बन्ध में सीमेंट फैक्ट्री कर्मचारी ‍सर्वेश्वर शर्मा अपने 60श्रमिक समुह के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि हम ‌प्रार्थीगण उत्तर प्रदेश सरकार के व्दारा निर्गत शासनादेश 01 जुलाई 1989 के आधार पर सेवानिवृत्त/छंटनी के पश्चात पेंशन पाने का हकदार थे। परन्तु तत्कालीन भ्रष्ट शासन प्रशासन के कारण शासनादेश का अनुपालन न करते हुए उपरोक्त कारखाने के कर्मचारियों को आज तक राज्य पेंशन भुगतान नहीं किया गया।

इसी क्रम में श्री शर्मा ने बताया कि चुर्क गुरमा, डाला व चुनार के कुल श्रमिको में से 25 प्रतिशत कर्मचारी सेवानिवृत्त हो कर नियमानुसार पेंशन ले रहे हैं। 25 प्रतिशत कर्मचारी समायोजन का मुकदमा कर के अपनी सेवा शर्तें पूरी कर के पेंशन पा रहे हैं। 25 प्रतिशत कर्मचारी हाईकोर्ट इलाहाबाद में मुकदमा लगाये हुए हैं जो निर्णय के कगार पर है। शेष 25 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जो अपनी परिस्थितियों के अनुसार शासन प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है परन्तु न्यायायल का शरण नहीं ले पाये है, जो आप के पास इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से प्राकृतिक एवं कानुनी न्याय की गुहार इस आशय से लगा रहे हैं कि हमारी वर्तमान सरकार जनता को बहुत तरह की जन सेवा के साथ साथ तरह-तरह सुविधाएं देने में सक्षम है। जो किसी को वैधानिक न्याय दिलाने में कोई आपत्ति नहीं होगी, जो गरीब मजदूरों के हितों में होगा।

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