बीजेपी और एनसीपी नदी के दो छोर हैं, जब तक नदी में पानी है, ये दोनों साथ नहीं आ सकते- नवाब मलिक

एनसीपी के सीनियर नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि बीजेपी और एनसीपी नदी के दो छोर हैं । जब तक नदी में पानी है, ये दोनों साथ नहीं आ सकते हैं । उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह से अलग हैं, चाहे वो वैचारिक हो या फिर राजनीतिक दृष्टि हो । एनसीपी और बीजेपी का साथ आना असंभव है । राजनीति विचारों के आधार पर होती है, संघ का राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी पार्टी के राष्ट्रवाद में ज़मीन आसमान आ अंतर है ।

नवाब मलिक का बयान ऐसे समय में आया जब दिल्ली में एनसीपी के मुखिया शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात हुई । दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है लेकिन शिवसेना का कहना है कि शरद पवार राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार बन सकते हैं ।

नवाब मलिक ने कहा कि शरद पवार पिछले 2 दिनों से दिल्ली में हैं । राज्यसभा में बीजेपी के सदन के नेता के रूप में नियुक्त होने के बाद पीयूष गोयल ने खुद उनसे शिष्टाचार मुलाकात की । कल शरद पवार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की ।

एनसीपी नेता ने उन बातों को भी गलत करार दिया जिसमें कहा गया कि शरद पवार से महाराष्ट्र के विपक्षी नेताओं ने मुलाकात की । नवाब मलिक ने कहा, “कई लोग गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र के विपक्षी नेताओं ने शरद पवार से मुलाकात की (पीएम और रक्षा मंत्री के साथ उनकी बैठकों की पृष्टभूमि में)।”

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को शरद पवार और पूर्व रक्षा मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ए के एंटनी से मुलाकात की थी । इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे भी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पूर्वी लद्दाख में भारत की सीमा पर चीन के साथ जारी गतिरोध से जुड़े ताजा पहलुओं पर चर्चा हुई । सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह ने पवार और एंटनी को सीमा पर की ताजा स्थिति और भारत की सैन्य तैयारियों से अवगत कराया. पवार देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं ।

शरद पवार की गिनती देश के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में होती है । 80 साल के पवार के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अच्छे संबंध भी हैं । पिछले दिनों उन्होंने कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की थी । उनकी इस कवायद को विपक्षी एकता मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा गया था ।

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