बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा की जांच करें मानवाधिकार आयोग, बढ़ सकती है सीएम ममता बनर्जी की मुश्किलें

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को आज एक के बाद एक तीन-तीन झटके लगे हैं। जिसके बाद पहली बार ममता बनर्जी बैकफुट पर नजर आईं हैं। जिसके बाद ही ममता ने घोषणा की है कि वो दिल्ली आने वाली हैं। ममता बनर्जी दिल्ली में विभिन्न विपक्षी पार्टियों से भी मिलेंगी और सोनिया गांधी के साथ भी ममता की मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।

कोलकाता हाईकोर्ट की तरफ से मानवाधिकार आयोग को कहा गया था कि एक टीम बनाकर बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा की जांच करें। 50 पन्नों की रिपोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट को सौंप दी गई है। अदालत को 13 जून को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने सिफारिश की है कि हत्या, बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों को जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए और इन मामलों में मुकदमा राज्य से बाहर चलना चाहिए। एनएचआऱसी की 7 सदस्यीय टीम ने 20 दिन में 311 से अधिक जगहों का मुआयना करने के बाद राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दौरान टीम को राज्य के 23 जिलों से 1979 शिकायतें मिलीं। इनमें ढेर सारे मामले गंभीर अपराध से संबंधित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 9,300 आरोपितों में से पश्चिम बंगाल पुलिस ने केवल 1,300 को गिरफ्तार किया और इनमें से 1,086 जमानत पर रिहा हो गए। एनएचआरसी समिति ने अपनी बेहद तल्ख टिप्पणी में कहा, ‘‘सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों द्वारा यह हिंसा मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों को सबक सिखाने के लिए की गई। बंगाल में कानून का शासन नहीं है बल्कि सत्ता में बैठे लोगों का शासन है। एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में ‘‘हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों’’ की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने और इन मामलों में मुकदमा राज्य से बाहर चलाए जाने की सिफारिश की है।

पश्चिम बंगाल में राजनीति भूचाल लाने वाले नारद स्टिंग घोटाले पर कलकत्ता हाईकोर्ट 16 अगस्त को सुनवाई करेगा। सीबीआई ने नारद स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में ममता बनर्जी, मोलॉय घटक और राज्य के खिलाफ नए हलफनामे दायर किया है। सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि ममता बनर्जी ने अधिकारियों को धमकाने के साथ तृणमूल नेताओं को छोड़ने की बात कह रही थीं।

ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं और अब माना जा रहा है कि वह भवानीपुर सीट से नामांकन दाखिल करेंगी। चुनाव के नतीजे आने के कुछ समय बाद ही तृणमूल कांग्रेस से जीते शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भवानीपुर सीट छोड़ दी थी। चट्टोपाध्याय अब खारदह सीट से चुनाव लड़ेंगे जो तृणमूल की काजल सिन्हा के कोविड-19 से निधन होने के बाद खाली हो गई थी। मौजूद समय में वह विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें 6 महीने के अंदर विधानसभा का सदस्य बनना होगा। अब तृणमूल कांग्रेस राज्य में उपचुनाव चाहती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने निर्वाचन आयोग को सूचित कर दिया है कि राज्य, सात विधानसभा सीटों पर उप चुनाव कराने के लिए तैयार है क्योंकि इन क्षेत्रों में कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण में है। कोरोना की तीसरी लहर सितंबर-अक्टूबर के आस-पास आने की संभावना बताई जा रही है। ऐसी परिस्थिति में चुनाव कराने के बारे में आयोग द्वारा फैसला लिया जाएगा इसकी संभावना मुश्किल लग रही है। जिस तरह से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की जा रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से भी दूसरी वेब की त्रासदी देखने के बाद राहत मिलने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस महीने के अंत तक नयी दिल्ली की यात्रा कर सकती हैं जहां वह विभिन्न गैर-भाजपा दलों के नेताओं के साथ बातचीत करेंगी। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी मोर्चा बनाए जाने की अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। कुछ खबरों के अनुसार, ममता 25 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी रवाना होंगी। ममता ने कहा कि अगर समय दिया गया तो वो पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिलेंगी।

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