फर्जी पट्टा आवंटन मामले में लेखपाल सहित चार पर मुकदमा दर्ज, हड़कम्प

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

प्रतीकात्मक फोटो

1996 में किया गया था चन्द्रावती के नाम फर्जी पट्टा

● जमीन असंक्रमणीय से हो गयी थी संक्रमणीय

जनपद न्यूज Live ने किया था मामले का सबसे पहले खुलासा

● पूरी जांच हुई तो तहसीलदार स्तर तक फंस सकते हैं अधिकारी

● सूत्रों के मुताबिक बंजर भूमि को पट्टा कर बेचने के फिराक में थे सभी

● एडीएम की जांच के बाद जिलाधिकारी ने दिया था एफआईआर दर्ज करने का आदेश

● सोनभद्र में ऐसे बहुतेरे मामले अभी भी चल रहे हैं विवादित

● कई लेखपाल जमीन का करते हैं खेला, पहले जमीन को दिखाते हैं विवादित, फिर अपनों के नाम करते हैं दर्ज

● उभ्भा कांड के बाद भी सोनभद्र में नहीं सुलझ सका जमीनी विवाद

सोनभद्र । उभ्भा कांड की घटना ने न सिर्फ सोनभद्र बल्कि पूरे देश को हिला के रख दिया था। घटना बड़ी थी तो सीएम को भी सोनभद्र आना पड़ा और जब सीएम घटना स्थल पहुंचे तो जांच भी बड़ी लेवल की तय कर दी गयी। जांच रिपोर्ट में कई बड़े नामों का खुलासा हुआ और अब कार्यवाही की तैयारियाँ चल रही है, मगर सोनभद्र में जमीन का खेला रुका नहीं। सोनभद्र में ऐसे तमाम मामले आज भी है जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ऐसे ही एक मामले में प्रशासन को FIR तक दर्ज करानी पड़ी।

म्योरपुर ब्लाक का काचन गांव पिछले कुछ महीनों से फर्जी पट्टे आवंटित किये जाने को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। काचन गांव में फर्जी पट्टा किये जाने का मामला सबसे पहले जनपद न्यूज Live ने उठाया था लेकिन हर बार जांच रिपोर्ट दबा दी जाती थी लेकिन इस बार आखिरकार किस्मत ने धोखा दिया तो मामला थाने तक पहुंच गया और लेखपाल विनय कुमार गुप्ता की तहरीर पर म्योरपुर थाने में तत्कालीन लेखपाल राजेश कुमार मिश्र, राजस्व निरीक्षक कृपा शंकर, भूमि प्रबन्धन समिति की अध्यक्ष पवित्री देवी व आवंटी चन्द्रावती पत्नी तेजन के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।

लेखपाल विनय कुमार गुप्ता ने अपने तहरीर में लिखा कि तहसील दुद्धी के काचन गांव में बंजर की भूमि को असंवैधानिक रूप से चन्द्रावती के नाम कर दी गयी थी। जिसकी जांच जिलाधिकारी के आदेश पर मांगी गई थी, जांच में पाया गया कि सन 1996-1997 में भूमि प्रबन्धन समिति द्वारा कृषि भूमि आवंटन के तहत खतौनी में दर्ज हुए थे। स्थलीय जांच में उक्त आराजियात परती व भूमि पथरीली प्राप्त हुई है व ग्रामवासियों से पूछताछ में पता चला कि चन्द्रावती पुत्री तेजन नाम की कोई भी महिला वर्तमान में गांव में नही है।

प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराकर भले यह संदेश दे दिया कि वह गलत बर्दाश नहीं करेगा लेकिन मामला दर्ज होते ही अब कई भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जिसमें पहला सवाल यह उठता है कि क्या किसी लड़की को पट्टा दिया जा सकता है? क्योंकि जिस समय 1996-97 में यह पट्टा हुआ उस समय चंद्रावती के साथ पिता का नाम जुड़ा है, यानी साफ है कि चन्द्रावती अविवाहित थी, यदि शादीशुदा होती तो पति का नाम आता।

दूसरा बड़ा सवाल यह उठता है कि जांच रिपोर्ट में यह क्यों नहीं देखा गया कि यदि गांव में चन्द्रावती नहीं है तो आखिर बंजर जमीन असंक्रमणीय से संक्रमणीय कैसे हो गई? क्योंकि इसके लिए कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो वह प्रक्रिया कौन पूरी करता था? क्या कोई और भी इस खेल में शामिल है जिसका नाम अभी आना बाकी है?

इस तरह के कई सवाल है जो प्रशासन को हल करने होंगे। क्योंकि सोनभद्र में जमीन के नाम पर बहुतेरे खेल हुए हैं चाहे खनन क्षेत्र में हो या फिर दूर दराज के इलाकों में।

अब देखना हैं कि काचन के मामले में और कितने राज सामने आते हैं।

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