चाणक्य नीति: व्यक्ति की किन गलतियों के कारण उसकी धन-संपत्ति आदि सबकुछ नष्ट, जानें

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से एक साधारण बालक चंद्रगुप्त को मौर्य वंश का सम्राट बना दिया था। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रांसगिक हैं। चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में धन, तरक्की, विवाह, कारोबार और नौकरी आदि से जुड़ी समस्याओं का हल बताया है। एक श्लोक के जरिए चाणक्य ने बताया है कि व्यक्ति की किन गलतियों के कारण उसकी धन-संपत्ति आदि सबकुछ नष्ट हो सकती है। पढ़ें आज की चाणक्य नीति-

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवाणि परिषेवते।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव हि।।

चाणक्य कहते हैं कि जो निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है वह नष्ट होना तय हो जाता है। अनिश्चित खुद भी नष्ट होता है।

चाणक्य का कहना है कि जो व्यक्ति निश्चित चीजों को छोड़कर अनिश्चित चीजों के पीछे भागता है, उसके हाथ कुछ भी नहीं लगता है। लालची व्यक्ति के साथ आमतौर पर ऐसा ही होता है कि अंत में उसे पछताना पड़ता है। चाणक्य का मानना है कि जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमें बुरे कर्मों और लालच से दूर रहना है। नीति शास्त्र के अनुसार, समझदारी इसी में होती है कि जो चीजें हमारे पास हैं, हमें उन्हीं से संतोष करना चाहिए।

इन तीन चीजों से व्यक्ति का नहीं भरता मन:
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति का धन, जीवन और भोजन से कभी मन नहीं भरता है। पर्याप्त होने पर भी इन तीन चीजों की लालसा व्यक्ति को हमेशा रहती है। ऐसे में व्यक्ति को जीवन में सफल होने के लिए संतोष का भाव होना जरूरी है।

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