नगर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी बदल गयी लेकिन नहीं बदली व्यवस्था

गौरव पाण्डेय (संवाददाता)

० एक ही टंकी के सहारे पूरे नगर की पेयजल व्यवस्था

० आधी से अधिक आबादी खुद के बोरिंग व हैण्डपम्प के सहारे

० लेकिन गरीबों को बरसों से नसीब नहीं हो रहा सप्लाई का पानी

फरीदपुर नगर की पेयजल व्यवस्था बरसों से लड़खड़ाई हुई है । ना जाने कितने लोग नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर चले गए मगर आज तक किसी भी पालिका अध्यक्ष ने नगर की अहम पेयजल व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया । आजादी के बाद से जब से फरीदपुर की नगर पालिका बनी तभी से यहां की पेयजल व्यवस्था एक ही टंकी के सहारे चल रही है । नगर की आबादी बढ़ते-बढ़ते 70 से 80 हजार के करीब पहुंच गई है मगर नगर वासियों को पीने के लिए पानी की व्यवस्था समुचित रूप से आज तक फरीदपुर नगरपालिका नहीं कर पाई है। नगर में 25 वार्ड हैं और पूरे नगर क्षेत्र में नगर पालिका ने बरसों पहले ही पानी की पाइप लाइन अरबों रुपया खर्च कर बिछवा दी थी मगर एक ही वाटर टैंक होने के कारण पूरे नगर क्षेत्र को पेयजल की सप्लाई पर्याप्त रूप से नहीं हो पाती है इसके लिए नगर की जनता ने अनेकों बार यहां के जनप्रतिनिधियों नगर पालिका में चुनकर गए अध्यक्षों एवं सभासदों से इस समस्या को रखा मगर इस जनता से जुड़ी इस अहम समस्या का आज तक निदान करने की यहां की नगर पालिका ने हिम्मत नहीं जुटाई है। आबादी को देखते हुए पालिका को एक और वाटर टैंक का निर्माण कराना चाहिए था जिससे पालिका का वाटर टैक्स से आमदनी बढ़ेगी और जरूरतमंद लोगों को समय से पानी की टंकी के कनेक्शन भी हो सकेंगे और लोगों को पेयजल व्यवस्था का लाभ भी मिल सकेगा । नगर वासियों को पेयजल आपूर्ति बहाल करने को पालिका प्रशासन ने रेलवे फाटक के निकट बनाई विशाल काय पानी की टंकी फिर भी फरीदपुर प्यासा ।
बता दें जिला बरेली का नगर पालिका प्रशासन नगर वासियों को बेहतरीन पेयजल प्रकाश सड़क निर्माण नाला निर्माण के साथ स्वच्छ भारत अभियान में भी नाकाम साबित हुआ । काफी लंबे अरसे से करोड़ों की लागत से तैयार रेलवे फाटक के निकट पानी की टंकी सफेद हाथी साबित हुई । क्योंकि नगर में बिछी पाइप लाइन सैकड़ों जगह टूट गई जिसका मुख्य कारण बार-बार सड़क निर्माण करके सरकारी धन का खपत करना है और विकास के घोड़े दौड़ाना है । पेयजल व्यवस्था समूचे नगर में चौपट है लोग निजी हैंडपंप समरसेबल और मोटर के सहारे चल रही है। पेयजल व्यवस्था की समुचित देखरेख नहीं होना चौक पाइप लाइनों को अनदेखा करना पेयजल समस्या का गंभीर कारण है । पालिका प्रशासन का मेन मकसद बोर्ड बैठक आयोजित कर दबंग सभासदों के मार्गदर्शन पर चलकर दबंग ठेकेदारों को टेंडर देकर उटपटांग काम कराते हुए वित्तीय वर्ष की रकम का बंदरबांट करना है। जो जनहित में नहीं है। पालिका प्रशासन दबंग ठेकेदारों और दबंग सभासदों की कठपुतली बना हुआ है । जिसमें मुंह खोलने की हिम्मत नहीं है। इसी के चलते समूचा नगर पेयजल व्यवस्था से ध्वस्त है ।नगरवासी वित्तीय वर्ष की रकम से तैयार की गई विशालकाय टंकी की एक बूंद से अपने गले सीखने को आतुर हैं लेकिन टंकी का पानी फटी हुई पाइपलाइन के सहारे गंदी नालियों में नहर की तरह बहता है मोहल्ला परा राम लीला मैदान के निकट कैप्टन पीसी शर्मा के मकान के दरवाजे के नीचे पानी की टंकी का पाइप कई महीनों से क्षतिग्रस्त हो जाने से जब पानी की सप्लाई आती है तब हजारों लीटर पीने का पानी नालियो में बह रहा है जिसे कोई देखने वाला तक नहीं है । सरकार जल संरक्षण करने का निर्देश देती है मगर नगर पालिका इस तरफ ध्यान ही नहीं देती है। नगर पालिका प्रशासन सत्ताधारी सरकार के अधीन है जिधर दिशानिर्देश होता है वही पालिका प्रशासन की नजरें जाती हैं।



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