मौसम की मार शासन के फरमान से किसान परेशान

विनोद कुमार (संवाददाता)

– 100 कुन्तल की जगह 30 कुन्तल की होगी खरीद

शहाबगंज/इलिया। एक तरफ किसान मौसम की मार से परेशान है तो दूसरी तरफ शासन की नित्य नया फरमान किसानों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है।क्षेत्र में शासन द्वारा विपणन शाखा केन्द्र सेमरा, साधन सहकारी समिति खरौझा और मसोई गांव में स्थापित गेंहू क्रय केन्द्रों पर गेंहूं की खरीद किया जा रहा हैं।लेकिन खरीद पुरी गति से नहीं होने के कारण क्रय केन्द्रों पर भारी भीड़ लग रही है।लेकिन खुलेआसमान के नीचें किसान गेंहू रखने को विवश थे।इसी बीच पहले तौकते तूफान के कारण हुई भारी बरसात ने गेंहू भीगा दिया।जिससे भारी क्षति किसानों को उठानी पड़ी तब तक यास तूफान के कारण फिर समस्या उठानी पड़ी।लेकिन प्रदेश सरकार के नये फरमान ने किसानों के सपनों पर ब्रजपात कर दिया।पहले किसान एक बार में जहां 100कुन्तल तक गेंहूं की बिक्री रजिस्ट्रेशन के बाद कर रहे थे।लेकिन अब 30 कुन्तल तक ही गेंहूं बेचने के फरमान ने किसानों को परेशान कर दिया है।जिससे मजबूरन किसान गेंहूं औने पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने को विवश है।वही संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक राम अवध सिंह ने कहां कि केन्द्र और प्रदेश सरकार पहले किसान बिल लाकर किसानों को बर्बाद करना चाहती है।अब प्रदेश सरकार के नये फरमान ने किसानों को बर्बाद करने की पुरी तरह योजना बना लिया है।पहले रजिस्ट्रेशन व टोकन के नाप पर परेशान किया।जिससे छोटे किसान शादी विवाह के देखते हुए विचौलियों को बेचकर खाली हो गये।अब 30 कुन्तल तक ही गेंहूं खरीद करने के आदेश तानाशाही रवैया का परिचायक है।जबकि की ऐसे खराब मौसम में सरकार का उद्देश्य होना चाहिए की अधिक से अधिक खरीद कर किसानों की समस्याओं का निपटारा किया जाय।जबकि पूर्व में धान बेचने के दौरान भी समस्या उठानी पड़ी अब गेंहूं बेचने के लिए क्रय केन्द्रों का चक्कर लगानी पड़ रही है।जबकि फर्जी खरीदी के आधार तैयार रिपोर्ट के आधार पर सरकार सभी किसानों का खरीद होने का दावा करती है।उन्होंने कहां कि खरीद में तेजी लाने के साथ खरीद के नये आदेश को वापस नहीं लेगी तो किसान संघटन आन्दोलन को बाध्य होगे।



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