गांवों में टीकाकरण को लेकर ग्रामीणों में खौफ, महीनों से नहीं ले रहे कोटे की राशन

स्पेशल रिपोर्ट :

संजय केसरी (संवाददाता)

डाला । जिस बात का अंदेशा पंचायत चुनाव के पहले लगाया जा रहा था कि गांव की सरकार चुनने के चक्कर में कहीं कोरोना का संक्रमण गांवों में न फैल जाय । और आखिरकार वही हुआ । पंचायत चुनाव खत्म होते ही बड़ी तेजी से गांव से मौत की खबरें आने लगी ।

मौत की खबर मिलने के बाद आखिरकार सरकार हरकत में आई और गांव में जागरूकता अभियान चलाने के साथ टीकाकरण के लिए भी चौपाल लगाना शुरू किया । यहां तक कि मुनादी भी कराई जा रही है लेकिन कई गांवों में टीकाकरण को लेकर जिस तरह से भ्रांतियां फैली है उससे इस अभियान को बड़ा झटका लग सकता है ।

शिवरतन का कहना है कि टीका लगाने से बुखार आएगा और बुखार आते ही उन्हें कोरोना हो जाएगा । टीके को लेकर ग्रामीणों के अंदर भ्रांतियां इस कदर बैठी हैं कि वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं ।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि टीका लगाने के बाद उन्हें कुछ हो गया तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा ।

रामराज का कहना है कि ग्रामीणों में टीकाकरण को लेकर इस कदर भय बैठा है कि वे महीनों से कोटे की राशन इसलिए नहीं उठा रहे हैं कि कहीं वहां टीका न लगा दें ।

बहरहाल शासन ने कोरोना को लेकर शहरी इलाकों में काफी हद तक काबू पा लिया है लेकिन जिस तरह से गांव में मौतें हो रही हैं और वह भी बिना किसी जांच के । ऐसे में कोरोना टीकाकरण को लेकर जिस तरह से ग्रामीणों में भ्रांति व डर बैठता जा रहा है वह कोरोना खात्मे के अभियान को कहीं कमजोर न कर दे।



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