कोरोना इफेक्ट: गले मिलकर नहीं, दो गज दूरी से कहें- ईद मुबारक…

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र ।

न मेरा है न तेरा है, ये सबका है त्योहार, मुबारक ईद मुबारक सभी को ईद मुबारक… किसी बॉलीवुड फिल्म का ये गाना ईद के दिन की खुशियों को दर्शाती है, हर साल इसी तरह लोग मिलजुल कर ईद मानते थे। लेकिन कोरोना वायरस के बचाव को लेकर लॉकडाउन के चलते पिछले साल की तरह इस बार बार भी ईद कुछ अलग अंदाज में मनेगी। बता दें कि ईद-उल-फित्र का त्योहार मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा एवं खुशियों का है त्योहार है। तीस दिन का रोजा के बाद ईद का पर्व आता है। ईद के मौके पर नए-नए कपड़े पहनते हैं तथा घर में लजीज व्यंजन बनता है जो बच्चों के उत्सास को दोगुना करता है। लेकिन लॉकडाउन एवं कोरोना संक्रमण के डर के साये में ईद की खुशी के इजहार के तौर-तरीके बदले-बदले से होंगे। हर साल ईद के मौके पर परवान चढ़ने वाले कई रिवाज इस बार के त्योहार का हिस्सा नहीं होंगे। खुशियां तो होंगी लेकिन गले मिलकर उन्हें बांट नहीं सकेंगे। चांद रात भी होगी, लेकिन बाजारों में रौनक नहीं होगी। ईदगाह तो अपनी जगह होंगे, लेकिन वहां ईद की नमाज नहीं होगी। न नए कपड़े होंगे, न ही ईद मिलन की रस्म होगी। गलियां सुनी ही रहेगी। उतना चहल-पहल नहीं होगा जितना अमूमन हर ईद में होता था।

कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इस्लामिया कमेटी के सदर मुस्ताक अहमद ने सभी को ईद की मुबारकबाद देते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों से ईद का त्योहार सादगी से मनाने की अपील की है। उन्होंने रोजेदारों से शारीरिक दूरी का पूरा पालन करने और दूर से ही ईद की मुबारक देने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईद की नमाज मस्जिद में अदा न करने का मलाल न करें, घर पर सुरक्षित रहकर अपनों के बीच नमाज अदा कर अल्लाह की इबादत करें। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में लोगों की मदद के लिए आगे आए। जिससे जल्द कोरोना से निपटा जा सके।



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