राजनीतिक दूरदर्शिता का निशाना होगा जिला पंचायत अध्यक्ष

मनोहर कुमार

* विधान सभा चुनाव देखकर बन सकती है रणनीति
* मजबूत निर्दल दावेदार को दल में शामिल कराकर हो सकता है खेल।
चंदौली। धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद में प्रथम नागरिक यानि जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अंदर खाने राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। अभी तक मजबूत दावेदार कोई सामने नहीं आया है न ही कोई राजनीतिक दल अपने पत्ते खोले हैं। विधान सभा चुनाव की रणनीति के तहत ही दावेदार की तलाश हो रही है। मजबूत निर्दल दावेदार को भी पार्टी में शामिल कराकर किला फतह किया जा सकता है। इसमें सभी दल अपनी गोटी फिट करने में लगे है।
जिला स्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख पद के लिए चुनाव होना हैं।शासन की ओर से अभी तक तिथि तय नहीं की गई है। संभावना जताई जा रही है।इसी माह के अंत तक इस पदों पर भी चुनाव हो सकता है। इस बार के चुनाव में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अमूमन राजनीतिक दल अधिकृत उम्मीदवार उतारे थे।35 सदस्यीय जिला पंचायत में सबसे ज्यादा निर्दलियों की संख्या है। इसमें भाजपा के आठ, सपा के दस,बसपा के चार वा तेरह निर्दलीय सदस्य हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। अभी तक चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई। इसके पहले ही राजनीतिक दलों के अलावा दमदार निर्दल दावेदार सदस्यों को लामबंद करने में जुटे हैं। हालांकि अभी तक कोई भी राजनीतिक दल अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कुछ दलों से संभावित दावेदार जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव हार गए।जो इस पद के लिए शुरू से ही रेस का घोड़ा थे। सियासी दल इस पद के लिए समीकरण का ताना बाना बुनने के साथ ही दावेदारों की तलाश तेज कर दी है। राजनीतिक दल ऐसे दावेदार की तलाश में हो जो आने वाले विधान सभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग का उभरते हुए प्रतिनिधि के साथ पार्टी का सहारा भी बने।इसके लिए निर्दल दावेदार में भी ज़मीन तलाश की जा रही है ताकि उसे पार्टी में शामिल कराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा किया जा सके।अब देखना हैं कि किस राजनीतिक दल के हाथ में जिला जिला जिला पंचायत की कमान होती है। सियासत में रंग बदलना एक चरित्र भी है।कौन सा रंग चडेगा देखना लाजिमी होगा।



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