प्राइवेट चिकित्सकों की जांच के नाम पर हो रही वसूली, जांच अधिकारी द्वारा धमकी दिए जाने का मामला आया सामने

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

★ जांच अधिकारी अपने प्राइवेट वाहन से जाते हैं जांच करने

★ जांच टीम पहले खुद बनाते हैं दबाव, फिर ड्राइवर को भेज कर करवाते हैं वसूली

जांच के ऊपर धमकी दिए जाने का भी लग चुका है आरोप

जांच अधिकारी खुद को सत्ताधारी विधायक का बताता है करीबी, उसी का क्षेत्र में देता है धौंस

सीएमओ के सज्ञान में होने के बावजूद अभी तक नहीं हुई कोई कार्यवाही

सीएमओ कार्यालय में भी गोपनीयता नहीं रही सुरक्षित

एक संविदा कर्मी द्वारा अपनी जगह दूसरे से काम कराये जाने का वीडियो भी हो चुका है वायरल

सोनभद्र । जैसे-जैसे विधान सभा चुनाव 2022 नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे जिले में भ्रष्टाचार भी बढ़ता जा रहा है । स्वास्थ्य विभाग में पिछले कुछ सालों से भ्रष्टाचार कुछ इस कदर हॉबी हो गया है कि लगता है भ्रष्टाचारियों के सामने नए सीएमओ ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं । उनके कुर्सी संभालने के बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा वसूली के दो बड़े मामले सामने आए जिन पर कार्यवाही तो दूर अब तक कोई ध्यान तक नहीं दिया गया । एक मामला चोपन थाना क्षेत्र का तो दूसरा म्योरपुर थाना क्षेत्र का है । बताया जा रहा है कि प्राइवेट चिकित्सक व प्राइवेट प्रैक्टिस किये जाने की जांच के एक मामले में स्वास्थ्य कर्मी व डॉक्टर सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हैं और वहीं दूसरे मामले में जांच टीम ने एक महिला चिकित्सक से न सिर्फ पैसे के लिए दबाव बनाया बल्कि सरेआम अपशब्दों का इश्तेमाल करते हुए धमकी भी दे डाला । बाद में महिला चिकित्सक ने हिम्मत जुटाते हुए इस उम्मीद से सीएमओ कार्यालय पहुंचकर नामजद शिकायत दर्ज कराया है कि उनके साथ न्याय होगा । लेकिन दोनों मामले में सीएमओ की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया । इसके अलावा भी लगातार अवैध वसूली किये जाने की शिकायत क्षेत्र से भी मिल रही है । लेकिन कार्यवाही न किये जाने से आरोपी डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों का लगातार मन बढ़ता जा रहा है । कई जगहों से निरीक्षण के नाम पर वसूली व गालीगलौज तक की शिकायत मिल रही है ।

सूत्रों की माने तो आरोपी डॉक्टर सरेआम खुद को सत्ताधारी एक विधायक का करीबी बताता है औऱ अन्य स्वास्थ्य कर्मी सिस्टम देकर टिकने की बात करते हैं ।

इस मामले में भी यहां के जनप्रतिनिधियों ने चुप्पी साध रखी है । आपको बतादें कि अभी हाल ही में सोनभद्र दौरे पर आये एमएलसी लक्ष्मण आचार्य ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार की उपलब्धि गिनाया था लेकिन जिस तरह से सोनभद्र में तैनात डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी सरकार की छवि खराब कर रहे है और यहां के जनप्रतिनिधि चुप्पी साध रखें है कहीं इसका खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में न भुगतना पड़ जाय ।

बहरहाल जिले को पिछड़े से अग्रणी जनपद में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा नीति आयोग बनाया गया था लेकिन सरकार को क्या पता कि जिनके कंधों पर वह यह जिम्मेदारी दे रहे हैं वह खुद को पिछड़े से अग्रणी बनाने में जुटे हुए हैं।



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