अवैध खनन के मामले में जनप्रतिनिधि क्यों है चुप ?

जनपद न्यूज ब्यूरो

फाइल फोटो

सोनभद्र । स्थानीय कम्पनियों में रोजगार न दिए जाने के मुद्दे के बाद एक बार फिर सोनभद्र में अवैध खनन को लेकर चर्चा शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री के विभाग वाले को भी खनन नहीं छोड़ रहे और जनप्रतिनिधि चुप हैं । इसी को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस तरीके से सोनभद्र में जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में 23 पत्थर पट्टेदारों द्वारा अवैध खनन कर करोड़ों रुपये का चूना सरकार को लगाया गया उससे एक बात साफ हो गयी कि खनन विभाग के अधिकारी खुद को जितना पाक-साफ बनने व दिखाने की कोशिश करते हैं उतने हैं नहीं । आखिर उनके रहते अवैध खनन कैसे हो गया ? आखिर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी ? लेकिन मामला सामने आने के बाद विभाग की बोलती भी बंद है । लेकिन जिले में चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर इतना बड़ा-बड़ा खेल हो रहा है तो आखिर जनप्रतिनिधि कड़ी कार्यवाही के लिए क्यों नहीं लिखते। क्योंकि जनप्रतिनिधियों को सोचना होगा कि आखिर सरकार उनकी है और विभाग उनके मुख्यमंत्री के पास हैं। जीरो टॉलरेंस की सरकार में जिस तरह से अवैध खनन का खेल चल रहा है और जनप्रतिनिधियों की तरफ से अब तक कोई भी रिएक्शन नहीं आया, इससे एक बार फिर उनके ऊपर सवाल खड़े कर रहा है ।
ओबरा विधायक का इलाका भी खनन क्षेत्र में आता है लेकिन उनके तरफ से भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी ।
शायद यही कारण है कि स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर दुद्धी विधायक ने सांसद सहित सभी जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था । उस समय भी सभी ने चुप्पी साधने में ही अपनी भलाई समझी थी ।
जहां एक तरफ सोनभद्र में खनन को शुरू करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है वहीं अवैध खनन माफियाओं की करतूत यहां का रिकार्ड खराब कर दिया जा रहा है और जनप्रतिनिधि चुप हैं । सूत्रों की माने तो शायद यही कारण है कि खनन के मुद्दे पर यहां के जनप्रतिनिधियों की क्रेडिट मुख्यमंत्री के सामने बेहद खराब है ।

कुल मिलाकर प्रशासन ने सभी अवैध खनन में लिप्त पट्टे धारकों से वसूली को लेकर नोटिस जारी कर दिया है लेकिन अब तक उन पट्टेधारकों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही क्या हुई यह साफ नहीं हो सका है । लोगों का मानना है कि सही मायने में कार्यवाही उन विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी होना चाहिए जिनके कन्धों पर इसे रोकने की जिम्मेदारी है । क्योंकि सरकार उन्हें इसी बात की तनख्वा देती है लेकिन हर बार इनका दायित्व कोई पूरा करता है।

बहरहाल प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही तो कर दी है लेकिन अब देखने वही बात यह है कि अवैध खनन किये जाने के मामले में कानूनी कार्यवाही कब होगी।



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