खेतों में सरसों के फूल बसंत का करा रहे एहसास

अनिता अग्रहरि (संवाददाता)

धीना। बसंत पंचमी का नाम सुनते ही व्यक्ति के मन मस्तिष्क में पीले पीले फूल दिखने लगते है।खेतों में सरसों के पीले फूल देखकर मन में मादकता का एहसास होने लगता है।सीवान पीले फूल से दुल्हन की तरह दिख रही है।
किसानो की पारंपरिक खेती में धान व गेंहू शामिल है।बावजूद नरवन व महाइच के किसान सरसों की खेती में अपना रुचि दिखा रहे है। इन दिनों खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है। पीले रंग से सजे खेतों को देखकर किसानों का दिल खुशी से झूम रहा है।सरसों के पीले फूल सीवान को मनमोहक बनाने में सहायक बन रहे है।खेतों में हल्की हवा बहते ही सरसो के फूल खुशी से झूमने लग जा रहे है। सरसों के पीले फूल के लहलहाने से मन मादकता का एहसास कर रहा है।खेतों में सरसों के फूल ऋतुराज बसंत के करीब आने की उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

किसान कामेश्वर राय डिघ्घी, संजय उपाध्याय तम्मागढ़, मनोज राय डैना, रतन सिंह सिकठा, रमेश राय पई, अजीत सिंह अरंगी, डॉ संजय सिंह पिपरदहा, यशवर्धन सिंह व अनूप सिंह घोसवा,ड़ा0 जयकुमार सिंह कम्हरिया, श्रीराम तिवारी रामपुर आदि लोगों ने बताया कि जाड़े के दिनों में फसल पर कीट पतंगों का हमला कम होता है। इससे सरसों व तीसी की बेहतर पैदावार होने की संभावना बढ़ जाती है। मौसम में समय समय पर परिवर्तन का सरसों की फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इससे किसानों को सरसों की खेती काफी फायदा देता है।



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