पंचायत चुनाव में जनसंख्या के आधार पर आदिवासियों को मिले आरक्षण

रमेश यादव (संवाददाता)

दुद्धी। पंचायत चुनाव को लेकर शासन स्तर पर आरक्षण की घोषणा होते ही अब क्षेत्र में आरक्षण को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पंचायत चुनाव में जो आरक्षण की नीति बनाई गई है उससे आदिवासियों के मंसूबे कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं और उनकी मंशा पर पानी फिर सकता है। सोनभद्र भौगोलिक दृष्टि से जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है यहां की आबादियों में लगभग 60 से 70% आबादी आदिवासी जनजातियों की है। आदिवासियों की विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है अभी कुछ दिन पहले ही माननीय मुख्यमंत्री जी जनजाति कि विकास एवं रोजगार को लेकर प्राथमिकता देने की बात कही थी लेकिन जिस हिसाब से आरक्षण की नीति तय की गई है उस आरक्षण नीति से आदिवासियों को पंचायत चुनाव में अधिक लाभ मिलती हुई नहीं दिख रही है क्योंकि पंचायत चुनाव से ही स्थानीय प्रतिनिधि का चयन होता है। जिसकी एक राजनीतिक भागीदारी शुरू होती है। इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पिछले साल दिसंबर माह में आदिवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल जनजाति आयोग एवं उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव से मुलाकात करते हुए पत्राचार भी किया था ।आदिवासियों ने मांग की थी कि पंचायत चुनाव में आदिवासियों को आरक्षण जनसंख्या के आधार पर दिया जाए ताकि पंचायत चुनाव में आदिवासियों की भागीदारी बढ़ सके। उक्त बातें अखिल भारतीय आदिवासी महासंघ के जिला अध्यक्ष फौदा सिंह परस्ते ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहीं ।उन्होंने सरकार से मांग किया है कि पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा जिला पंचायत सदस्य के पदों पर आदिवासी जनजातियों को प्रमुखता से आरक्षण दिया जाए।



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