साइबर हैकरों ने NRHM को बनाया अपना निशाना, खाते से उड़ाए 92 लाख रुपये

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

● चार खातों से लगभग 71 बार हुआ ट्रांजेक्शन

● सबसे पहले अक्टूबर में खाते से निकला पैसा

● हैकरों द्वारा लाखों रुपये उड़ाए जाने से स्वास्थ्य विभाग की उड़ी नीद

● भागलपुर, झारखण्ड के खातों में हुआ ट्रांजेक्शन

● राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सोनभद्र का बैंक खाता सीज

सोनभद्र । अब तक आपने साइबर क्राइम के कई मामले पढ़े होंगे। लोगों के खातों से ठग कैसे पैसे उड़ा लेते हैं यह अक्सर पढ़ने व सुनने को मिलता है लेकिन सोनभद्र में साइबर क्राइम का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। इस बार साइबर क्राइम से जुड़े हैकरों ने बड़ा खेल करते हुए स्वास्थ्य विभाग को ही अपना निशाना बनाया और उनके खातों से 92 लाख उड़ा लिए। इतनी बड़ी रकम चले जाने की खबर विभाग को जनवरी को तब हुआ जब विभाग के एकाउंटेंट तौहीद आलम को स्टेटमेंट देखकर शक हुआ। जब जांच आगे बढ़ी तो मामला परत दर परत खुलने लगी। लेकिन तब तक काफी देर हो चुका था और हैकरों ने स्वास्थ्य विभाग के 4 खातों से 71 बार ट्रांजेक्शन कर 92 लाख 10 हजार निकाल चुके थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सोनभद्र का बैंक खाता ही बन्द करा दिया और मामले की जानकारी पुलिस को देते हुए एक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया।

इस पूरे मामले पर डिप्टी सीएमओ बी0के0 अग्रवाल का कहना है कि “राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित खातों को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा PFMS पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाता है, चूंकि यह मामला त्रैमासिक बैंक समाधान विवरण बनाते समय सामने आया। पहला ट्रांजेक्शन 16 अक्टूबर 2020 को किया गया था, उसके बाद 25 जनवरी 2021 तक हैकरों के 20 अलग-अलग खातों में कुल 92.10 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ये चारों खाते भारतीय स्टेट बैंक में संचालित होते हैं। जो अभी तक जानकारी मिल सकी है, उसके मुताबिक भागलपुर, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल व असम के खातों में ये ट्रांजेक्शन हुआ है।”

डॉ0 अग्रवाल ने बताया कि “मामले की जानकारी जिलाधिकारी व पुलिस को दी गयी है साथ ही एफआईआर भी दर्ज करा दिया गया है।
उन्होंने माना कि चूंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का खाता सीज कर दिया गया है तो निश्चित तौर पर इस विभाग से जुड़े कर्मचारियों के वेतन में दिक्कत आ सकती है।”

पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि “मामला एक लाख से अधिक के साइबर क्राइम का है। इसलिए इसे मिर्जापुर मंडल के साइबर सेल को जांच के लिए भेजा गया है। 92 लाख गायब होने की जांच में पुलिस जुटी हुई है। जल्द ही इस मामले का खुलासा किया जाएगा।”

बहरहाल साइबर क्राइम का शिकार स्वास्थ्य विभाग भले ही एफआईआर दर्ज करा कर मामले को पुलिस विभाग के पाले में डाल दिया हो। मगर सवाल यह उठता है कि जहां एक तरफ सरकार लगातार डिजिटल की बात कर रही है और सरकारी विभाग खुद सुरक्षित नहीं है, ऐसे में आम जनता कितनी सुरक्षित हो पाएगी यह एक बड़ा सवाल है।



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