इस व्रत में स्नान, दान, तर्पण, आहार में तिल का विशेष हैं महत्व, जानें

माघ माह को मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। माघ माह में हर दिन पवित्र माना जाता है लेकिन एकादशी का विशेष महत्व है। माघ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी षटतिला एकादशी कहलाती है। इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग किया जाता है। इस कारण इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। षटतिला एकादशी बताती है कि अन्नदान सबसे बड़ा दान है। इस व्रत में मन को शुद्ध रखें।

माघ मास में शरद ऋतु चरम पर होती है और इस मौसम में तिलों का महत्व बढ़ जाता है। इस व्रत में स्नान, दान, तर्पण, आहार में तिल का विशेष महत्व है। दशमी के दिन एक समय भोजन करना चाहिए और प्रभु का स्मरण करना चाहिए। एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना करें। रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इस व्रत में स्नान, दान से लेकर आहार तक में तिलों का प्रयोग करना चाहिए। इस दिन उपवास कर दान, तर्पण और विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में छह प्रकार से तिलों का उपयोग किया जाता है। इनमें तिल से स्नान, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिलों का दान किया जाता है, इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है। इस व्रत में क्रोध, अहंकार, काम, लोभ का त्याग करें। षटतिला एकादशी पर तिल से भरा बर्तन दान करना शुभ माना जाता है। द्वादशी पर सुबह स्नान कर भगवान श्रीहरि विष्णु को भोग लगाएं और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। षटतिला एकादशी की रात को भगवान का भजन-कीर्तन अवश्य करना चाहिए। इस दिन काली गाय की पूजा करना भी शुभ माना गया है।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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