शिक्षकों का ट्रांसफर मुद्दा : सीएम के ट्वीट ने बिगाड़ा खेल या मंत्री के बयान ने, पढ़ें पूरी खबर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । यूपी सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में शुरू की गई अंतर्जनपदीय तबादला नीति अब उसी के लिए गले की फांस बन गयी है। सितम्बर में सीएम योगी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर 54 हजार शिक्षकों के तबादले कर दिए जाने की जानकारी दी गयी थी। मगर जब आवेदन करने वाले शिक्षकों के तबादले नहीं हुए तो वे सड़क पर आ गए। ऐसे में पहले मीडिया के बीच वाहवाही लूटी चुके सरकार के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अब सीएम के ट्वीट को ही गलत बात रहे हैं।

पेश है एक रिपोर्ट

कोरोना काल के बीच यूपी सरकार ने शिक्षकों को सहुलियत देते हुए दूर दराज नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए अंतर्जनपदीय तबादला नीति ले कर आई। लम्बे समय बाद सरकार की इस पहल से शिक्षकों को मानों संजीवनी मिल गया हो, आकांक्षी जनपद सहित सभी शिक्षकों ने इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया।

बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्राप्त आवेदन के बाद उनमें से लगभग 54 हजार आवेदन को स्वीकृत भी कर दिया गया। कोरोना काल में इतनी बड़ी संख्या में तबादला करने का श्रेय लेने के चक्कर में सीएम के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से 54 हजार शिक्षकों के तबादले किये जाने की जानकारी दे दी गयी। अब जब सीएम ऑफिस द्वारा ट्वीट किये जाने की जानकारी दी गयी तो आवेदन करने वाला हर शिक्षक खुद के आवेदन को स्वीकृत मनाने लगा लेकिन जब कई महीने बीतने के बाद भी उनका तबादला नहीं हुआ तो उन शिक्षकों ने जानकारी जुटाना शुरू कर दिया और सड़क पर उतर गए।

आवेदन करने वाली शिक्षिका का कहना है कि वे सरकार के आदेश के क्रम में ही आवेदन किया था लेकिन अब तक उनका तबादला नहीं हुआ और न ही कोई स्पष्ट जबाब दिया जा रहा कि आखिर उनका तबादला क्यों नहीं किया जा रहा।

वहीं गुरुवार को जनपद दौरे पर आए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ0 सतीश द्विवेदी के सामने जब यह मुद्दा उठा तो वे बैकफुट पर नजर आने लगे। उनका कहना है कि सभी का तबादला करना सम्भव नहीं है। लेकिन जब सीएम के ट्वीट के बारे में पूछा गया तो मंत्री ने बताया कि गलतियाँ हो जाती हैं। दरअसल 21 हजार शिक्षकों के ही तबादले हुए हैं।

बहरहाल शिक्षकों के तबादला नीति को लेकर सरकार बैकफुट पर है। अब गलतियाँ किस स्तर पर है यह तो सरकार ही साफ कर सकेगी लेकिन जिस तरीके से सरकार अब इस मामले से पल्ला झाड़ने पर लगा हुआ है ऐसे में शिक्षकों को यह समझ में नहीं आ रहा कि वे आखिरकार गुहार लगाएँ भी तो किससे?



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