कैंसर… पर जिंदगी का अंत नही, पढ़े पूरी खबर

संजय केसरी (संवाददाता)

डाला। दुनिया में सबसे घातक बीमारियों में से एक कैंसर तमाम वैज्ञानिक उपलब्धियों के बावजूद आज भी हर मिनट 17 लोगों की जान ले रहा है। इस बीमारी के इलाज में जितनी गंभीरता की जरूरत है उतनी जरूरी इसके बारे में जागरूकता होना भी है।

यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) पिछले 88 वर्षों से दुनिया के 70 देशों में कैंसर से बचाव के लिए अभियान चला रहा है। देश से दुनिया भर के लोगों को संदेश दिया जा रहा है कि आप कोई भी हैं, आपका एक फैसला बेहद अहम है। दुनिया के हर व्यक्ति को कैंसर मुक्त दुनिया के लिए प्रण लेना होगा।

कैंसर…पर जिंदगी का अंत नहीं

अगर इंसान की हौसला बुलंद हो तो कुछ भी असंभव नहीं है जी हाँ हम बात कर रहे हैं ग्राम खड़का पो0 अधवार जिला मिर्जापुर के निवासी 55वर्षीय कमला शंकर सिंह की जो आर्युवेदिक अस्पताल गुरमुरा में वार्ड व्याय के पद पर कार्यरत हैं जिसने कैंसर जैसी भयंकर बीमारी को मात देकर ऐसा कर दिया कि जो औरो के लिए मिशाल कायम कर आज जिंदगी सुखमय बिता रहा हैं।

बात अगस्त 2017 की हैं जब कमला शंकर सिंह को पता चला कि उसे कैंसर जैसी महाबीमारी हो गया हैं तो मानो उसके व उसके परिवार पर पहाड़ टूट गया हो उसकी जिंदगी जैसे थम सी गई हो क्योंकि घर कमाने वाला मात्र यही व्यक्ति था लेकिन यहाँ पर कमला शंकर सिंह ने हौसला बुलन्द करते हुए धैर्य का परिचय देते हुए खुद ऑपरेशन करवाने के लिए सोच बनाई और ऑपरेशन करवाया और ऑपरेशन सफल भी हुआ।
कमला शंकर सिंह की सकारात्मक सोच और ऐसे दुःख के समय सूझ बूझ से काम लेने की वजह से आज वह कैंसर जैसी बीमारी को मात दे कर वह अपने कार्यो को दायित्व पूर्वक निर्वहन कर रहा हैं।
कमला शंकर सिंह ने अपनी सूझ बूझ का जिस तरह से परिचय दिया है वह दूसरे व्यक्ति के लिए एक मिसाल हैं। उसने यह साबित कर दिया कि कैंसर… पर जिंदगी का अंत नही हो सकता हैं।



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