पट्टेदार का पता नहीं, जमीन हो गया असंक्रमणीय से संक्रमणीय, जांच शुरू

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । सोनभद्र में जमीन का खेल कोई नया नहीं है। जमीन विवाद ने कभी लोगों को मुख्यधारा से मोड़ दिया तो कभी हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया। उभ्भा कांड के बाद प्रदेश ही नहीं पूरा देश सन्न रह गया था, सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर जमीन विवाद है तो सुलझता क्यों नहीं। यदि आप तहसील दिवस पर पड़ने वाले आवेदन पत्रों पर गौर करें तो ज्यादातर मामले जमीन विवाद से ही जुड़े होते हैं। आप सोच रहे होंगे कि आखिर इसकी चर्चा अभी क्यों हो रही है। दरअसल सोनभद्र में एक बार फिर जमीन का ऐसा मामला आया है जिसे देखकर प्रशासन भी सकते में आ गया। मामला म्योरपुर ब्लाक के काचन गांव का है। जहां एक पट्टे की जमीन ने प्रशासन को परेशान कर रखा है। बताया जा रहा है कि काचन गांव में अराजी नम्बर 1177 मि0, 526 ख मि0, 1185 मि0, 1186 ग्राम समाज के बंजर खाते में दर्ज थी, जिसे 1997 में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से चंद्रावती पुत्री तेजन के नाम पट्टा कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस नाम का गांव में कोई है ही नहीं। उन्होंने बताया कि अवैध ढंग से पट्टा होने की बात किसी को पता नहीं था लेकिन जब उक्त जमीन पर लगा बेशकीमती पेड़ कटने लगा तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। बताया जाता है कि विवाद थाने तक भी पहुंचा था लेकिन तहसील के प्रभावशाली कर्मचारियों ने बेशकीमती लकड़ियों को उठा लाए।

ऐसा नहीं कि यह मामला अभी उठा, इसके पहले भी उक्त मामला उठ चुका है लेकिन हर बार तहसील कर्मियों ने जांच को प्रभावित कर मामले को दबा दिया।

चूंकि गांव में प्रधानी चुनाव की सरगर्मी तेज हो गयी है और इस दौरान गड़े मुर्दे भी बाहर आने लगे है। इस मामले में ग्रामीणों को तब और हैरानी हुई जब उन्हें पता चला कि जिस बंजर की जमीन को फर्जी तरीके से चंद्रावती के नाम किया गया था उस असंक्रमणीय जमीन को संक्रमणीय करा दिया गया है, यानी चंद्रावती 1997 से अब तक उस जमीन को लेने के लिए लगातार लगी हुई थी।

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि ग्रामीणों के मुताबिक जब पट्टे की जमीन ही फर्जी तो आखिर वह जमीन असंक्रमणीय से संक्रमणीय कैसे हो गया? क्या रिपोर्ट भी बिना देखे लगा दिया गया या फिर जमीन के लिए तहसील में कोई ऐसा गुट काम कर रहा है जो फर्जी जमीनों को वैध बनाने में लगा हुआ है।

मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो एडीएम से लेकर दुद्धी तहसील तक हड़कम्प मच गया। एडीएम ने तत्काल जांच के आदेश भी दे दिए और एक सफ्ताह में रिपोर्ट देने की बात भी कही है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश में एंटी भू माफिया अभियान चल रहा है और उभ्भा कांड के बाद सोनभद्र में सीएम योगी के निर्देश पर जमीन विवाद को लेकर एसआईटी जांच कर रही थी तो उस समय यह मामला क्यों नहीं आया? क्या उस समय भी दुद्धी तहसील में उक्त गुट बचाने का काम कर रहा था?

बहरहाल एक बार फिर फर्जी पट्टे मामले की जांच शुरू हो गयी है। उक्त पट्टे की जमीन फर्जी है या फिर वैध, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
अब देखने वाली बात यह है कि उक्त फर्जी पट्टे की जमीन को वैद्य बनाने के लिए तहसील के कौन-कौन से कर्मचारी शामिल हैं और उन पर क्या कार्यवाही होती है?



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