बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की मनाई जयंती

संजय केसरी (संवाददाता)

डाला। कोटा में प्रथम बार महान स्वतंत्रता सेनानी, महान कर्मयोगी, बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री, गुदड़ी के लाल, उपेक्षितों के रहनुमा जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती मनाई गई।
जयंती समारोह में उपस्थित दीपू शर्मा ने कहाँ की, ” जननायक जी ने बिहार के गरीबों, दलितों, पिछड़ो, शोषित, वंचित, किसानो और नौजवानों के हित की लड़ाई लड़ी और इनको आगे लाने में अपना मुख्य योगदान दिया।
सर्वप्रथम जननायक जी ने बिहार के मैट्रिक तक की शिक्षा मुफ्त की।
किसानों के हित में प्रमुख कार्य किये। ऐसे अनेकों कार्य हैं जो जननायक जी ने बिहार की आम जनता के लिए किया।
बेदाग छवि, सरल, सौम्य, कुशल राजनीतिज्ञ, ओजस्वी वक्ता थे कर्पूरी जी।
जननायक कर्पूरी ठाकुर जी अपने जीवन मे कभी कोई चुनाव नही हारे और दो बार मुख्यमंत्री होने के बाद भी विरासत में अपने पुत्र को कच्चे का मकान छोड़ गए थे।
दीपू शर्मा ने भारत सरकार से मांग किया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को “भारत रत्न” सम्मान से नवाजा जाय।और अंत मे जननायक जी का चिर परिचित नारा का उदबोधन करके युवाओं का उत्साहवर्धन किया-‘अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो, कदम-कदम पर अड़ना सीखो,
जीना है तो मरना सीखो’।।”
जयंती समारोह में कामेश्वर प्रजापति, आतिश चंद्रवंशी, चंद्रेश शर्मा, लवकुश प्रजापति, सुरेश गोंड़, अखिलेश शर्मा, वीरेंद्र, सूरज, आकाश, रवि, शिवा, मदन, ब्रह्मानंद आदि लोग उपस्थित रहे।



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