पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता और रिम्स के पेइंग वार्ड में इलाज करवा रहे आरजेडी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ गई है। सूत्रों के अनुसार उनको सांस लेने में परेशानी हो रही है । रिम्स अधीक्षक और लालू का इलाज कर रहे डॉक्टर रिम्स पहुंच चुके हैं । इससे पहले झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी रिम्स पहुंच कर उनका हालचाल लेकर जा चुके हैं ।

पूर्व मुख्यमंत्री लालू को 23 दिसंबर 2017 को जेल भेजा गया था । लालू को जेल में करीब एक महीने पहले 3 साल पूरे हो चुके हैं । वे पिछले ढाई साल से रिम्स में इलाज करा रहे हैं। जेल से 6 सितंबर 2018 को इलाज के लिए रिम्स में शिफ्ट किया गया था और तब से लेकर उनका रिम्स में लगातार इलाज हो रहा है।
बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में जेल की सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव के जेल मैनुअल उल्लंघन से जुड़े मामले में महीने की शुरुआत में 8 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की, जिन पर कोर्ट ने सरकार से पिछली सुनवाई के दौरान जवाब मांगा था । झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष सभी पक्षों ने अपनी बात रखी. सरकार की तरफ से भी उन बिंदुओं पर जवाब दिया गया ।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने सरकार से कुछ और बिंदुओं पर जवाब देने के लिए कहा । साथ ही लालू यादव के स्वास्थ्य से जुड़े बिंदु पर सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई. इस मामले की अगली सुनवाई कल यानी शुक्रवार (22 जनवरी) को होनी है ।

कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को पेइंग वार्ड से केली बंगले और केली बंगले से पेइंग वार्ड शिफ्ट किए जाने को लेकर सवाल किया था कि ऐसा किसके कहने पर किया गया । कोर्ट ने लालू को सेवादार दिए जाने को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा था ।

पिछले साल 18 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के कई सवालों के जवाब नहीं दिए गए थे। हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई में पूरी तैयारी के साथ आने को कहा था ।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि लालू इस दौरान किस-किससे मिले, इस संबंध में भी विस्तृत बिंदुवार रिपोर्ट पेश की जाए।

राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू की ओर से जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सवाल उठाया गया कि वह जेल मैनुअल का धड़ल्ले से उल्लंघन कर रहे हैं और यह हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है ।



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