नीम हकीम खतरा-ए-जान, फिर भी अफसर मेहरबान

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

● स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों की कृपा से चल रहा है झोलाछाप डॉक्टरों का गोरखधंधा

● शहर से लेकर देहात तक सक्रिय है मौत के सौदागर

● सीएमओ ने जिले में तैनात कर रखा हैं झोलाछाप के लिए नोडल अधिकारी

● झोलाछाप के नोडल अधिकारी कार्यवाही की जगह काट रहे मलाई

सोनभद्र । इन दिनों जिले का स्वास्थ्य महकमा शून्य पड़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की खामोशी बता रही है की मिलीभगत से खेल हो रहा है। बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से नर्सिंग होम खुल रहे हैं। नर्सिंग होम एक्ट को ठेंगा दिखाते हुए आए दिन नर्सिंग होमों की ओपनिंग हो रही है। लेकिन जिम्मेदार कार्यवाही से कतरा रहे हैं। जबकि सीएमओ ने बाकायदा इसके लिए एक नोडल अधिकारी के नेतृत्व में झोलाछाप और मानक विपरीत संचालित हो रहे हॉस्पिटलों या पैथोलॉजी सेंटरों पर कार्यवाही के लिए नियुक्त कर रखा है। लेकिन नोडल अधिकारी और उनकी टीम की निष्क्रियता से इन दिनों कुकरमुत्ते की तरह अवैध नर्सिंगहोम और पैथोलॉजी खुले हैं।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के आँकडों पर गौर करें तो जिले में 52 हॉस्पिटल और महज 17 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं लेकिन इन दिनों मात्र जिला मुख्यालय पर ही सैकड़ों की संख्या में अवैध हॉस्पिटल और पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं।

बगैर पंजीकरण संचालित होने वाले ऐसे हॉस्पिटल और पैथोलॉजी सेंटरों को तो एक तरफ स्वास्थ्य विभाग फर्जी बताता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों पर आशिर्वाद की बरसात भी कर रहा है। ऐसे में कहीं न कहीं जिम्मेदारों की भूमिका संदेह के घेरे में है। प्रदेश के नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, क्लिनिक, पैथोलॉजी लैब को एक कानून के दायरे में लाने के लिए सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट बनाया है। लेकिन स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग, जिसके पास एक्ट का पालन करवाने का जिम्मा है, वहीं लापरवाही बरत रहा है।

हालांकि आये दिन समाजसेवियों की तरफ से स्वास्थ्य विभाग में अवैध हॉस्पिटलों और पैथोलॉजी सेंटरों पर कार्यवाही के लिए शिकायत भेजी जाती है लेकिन ये शिकायतें भी महज रद्दी की टोकरी की शोभा बढ़ाते हैं, इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती।

संदेह के घेरे में जिले के झोलाछाप के नोडल और उनकी टीम

अब इसे प्रशासनिक उदासीनता व अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी कहें, कि जिला मुख्यालय पर कुकरमुत्ते की तरह सैकड़ों की संख्या में अवैध हॉस्पिटल संचालित हो रहे हैं लेकिन इन पर आज तक लगाम नहीं लग सकी है। महज खानापूर्ति के लिए छापेमारी की जाती है, नोटिस पकड़ाई जाती है लेकिन उसके आगे कोई कार्यवाही नहीं कि जाती। इसी का फायदा उठाकर ऐसे हॉस्पिटल संचालक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं।

वहीं पूरे मामले पर जब झोलाछाप के नोडल अधिकारी डॉ0 गुरु प्रसाद से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल नॉट रिचेबल था।



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