आखिरकार जागा स्वास्थ महकमा, दुद्धी में ताबड़तोड़ छापेमारी से हड़कंप

रमेश कुमार (संवाददाता)

● एक निजी अस्पताल में महिला की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य महकमा

● दुद्धी में निजी अस्पतालों पर नोडल अधिकारी की ताबड़तोड़ छापेमारी से हड़कंप

● स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी अगर समय रहते किए होते छापेमारी तो नहीं घटती घटना

दुद्धी । स्थानीय कस्बे के एक अस्पताल संचालक की लापरवाही से महिला की मौत के सप्ताह भर बाद गुरूवार को स्वास्थ्य महकमें की नींद खुली। जिले भर के नर्सिंग होम एवं मेडिकल स्टोरों की जांच करने वाले नोडल आधिकारी डॉ0 गुरु प्रसाद मौर्या की अगुवाई में गठित दस्ते ने कस्बे के लगभग आधा दर्जन अस्पतालों पर छापामारी कर उसके वैधता की जांच पड़ताल की। इस दौरान एक हॉस्पिटल से अवैध रूप से रखे दो पैकेट ब्लड के अलावा कई सामान जब्त किये। महकमें की इस कारवाई की भनक लगते ही अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कई अस्पताल संचालक अस्पताल बंद कर फरार हो गये।

गुरूवार को दोपहर बाद जिस गुपचुप तरीके से तहसील मुख्यालय धमके नोडल अधिकारी ने निजी चिकित्सालय में छापेमारी की। वहीं छापेमारी से पूर्व कई चिकित्सालयों के ताले बंद मिले।

घटना के एक सप्ताह बाद नोडल अधिकारी के छापेमारी पर भी क्षेत्रीय नागरिकों ने सवाल खड़ा कर दिया। क्षेत्रीय नागरिकों ने कहा कि महिला की मौत के एक सप्ताह बाद स्वास्थ्य विभाग की इस छापेमारी का क्या मतलब है। जबकि जिस अस्पताल में महिला की मौत हुई वहाँ कोई जाँच नहीं की गई। क्षेत्रीय नागरिकों ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि क्या उक्त अस्पताल को बचाव का समय दिया गया था या यह महज खानापूर्ति की जा रही है।

वहीं कई अस्पतालों में बोर्ड पर लिखे डाक्टर का कोई अता-पता नहीं था। इसी तरह एक कथित अस्पताल में भी कोई डाक्टर नहीं मिला। इसके अलावा कुछ चिकित्सकों की जांच पड़ताल करने के बाद टीम शाम को रामनगर रेलवे फाटक के उस पार बगैर किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी के संचालित अस्पताल पर छापा मारा। कर्मियों द्वारा दिए गये कथित डाक्टर के नंबर पर फोन लगाने पर पटना से एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के एक छात्र ने फोन उठाया। इसके बाद नोडल अधिकारी ने स्टोर में अन्य दवाइयों के साथ कार्टून में रखे बगैर किसी सुरक्षा मानक के रखे दो यूनिट ब्लड को जब्त किया। ब्लड के बाबत मौजूद कर्मियों द्वारा कोई संतुष्टजनक उत्तर नहीं दिया।

बहरहाल जिस तरह स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी अब छापेमारी कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि घटना घटने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कुम्भकर्णी निद्रा टूटती है। यदि यहीं छापेमारी एक अंतराल पर होती रहती तो शायद अस्पताल संचालक मरीजों को गुमराह कर शोषण नही करते और शासन के मंशानुरूप लोगों स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता लेकिन न जाने किसके दबाव में नोडल अधिकारी छापेमारी करने के बजाय जिला मुख्यालय पर आराम फरमाते रहते हैं और किसी बड़ी घटना का इंतजार करते रहते हैं।



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