महिलाएं निमास्त्र व ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दे रही जैविक खेती को बढ़ावा

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । “हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा” इस कहावत को रॉबर्ट्सगंज विकास खण्ड के ग्राम भरुआ के समूह की महिलाएँ चरितार्थ कर रही है। यहाँ महिलाएँ बाजार से कीटनाशक दवा खरीदने के बजाय स्वयं ब्रह्मास्त्र व निमास्त्र जैसी जैविक दवा एवं केंचुआ खाद बनाकर अपने खेतों में प्रयोग कर रही हैं।

ब्रह्मास्त्र बड़े कीड़ों को नष्ट करने के काम आता है। वहीं नीमास्त्र का छिड़काव अंकुरित हो रहे फसल में करने से किसी प्रकार रोग नहीं फैलता। महिलाएँ इसका उपयोग खुद के खेतों के लिए कर रही है। मिल रहे लाभ को देखते हुए अन्य महिला समूह इस विधि को अपनाने लगी हैं। ग्राम भरुआ में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी आजीविका सखी का कहना है कि इन कीट नाशकों के उपयोग करने के पीछे उद्देश्य लोगों को रासयनिक खाद से मुक्ति दिलाना है।

जैविक खाद से तैयार सब्जियों का मूल्य भी बाजार में अन्य सब्जियों के अपेक्षा ज्यादा मिलता है, वहीं खाने में इनका स्वाद भी रासायनिक सब्जियों से बेहतर होता है। इसकी मांग बाजार में ज्यादा है, इसलिए सभी आजीविका सखी अब धीरे-धीरे समूह की महिलाओं को जैविक खेती की ओर लेकर आ रही हैं एवं रसायन का प्रयोग पूरी तरीके से बंद करने का प्रयास कर रही है। जिससे कृषि के आधुनिककीकरण से भी समूह की महिलाएं अपने रोजगार को बढ़ा सकें एवं आमदनी का सशक्त एवं सतत माध्यम बना सकें।



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