विपनेट क्लब के जीव विज्ञान सप्ताह चौथा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत। समाधान विकास समिति विपनेट क्लब के तत्वाधान में मनाए जा रहे जीव विज्ञान सप्ताह के चौथे दिन आज बुधवार को इकरा गर्ल्स पब्लिक इण्टर कालेज में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन नाजिर हुसैन ने बताया कि आदिमानव की पूंछ होती थी किंतु अब विलुप्त हो गई तथा जिराफ की गर्दन पहले छोटी थी। आकृति, आकार, रंग रूप तथा आवास संबंधी लक्षणों में ऐसा परिवर्तन जो सजीव को विशेष पर्यावरण में सफलतापूर्वक जीवित रहने में सहायक होता है, उसे अनुकूलन कहते हैं। जंतुओं तथा पौधों में यह अनुकूलन जलीय स्थलीय या वायुवीय हो सकता है। कालांतर में जीवो की रचना तथा कार्य प्रणाली में क्रमिक परिवर्तनों द्वारा जीवो की उत्पत्ति को ही जैव विकास कहा गया। जैव विकास के संबंध में 2 वैज्ञानिकों के नाम बहुचर्चित हैं इनके द्वारा रखे गए विचारों को लैमार्कवाद व डार्विनवाद कहा गया लैमार्कवाद में वातावरण के प्रभाव से अंगों की कम उपयोगिता होते ही विलुप्तीकरण होने लगता है । डार्विनवाद बताता है कि जीव जाति के सदस्यों में वंश चलाने व आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसे प्राकृतिक चयनवाद भी कहते हैं। समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया जिसमें कारियाने श्रेष्ठता दिखाई। कुमारी इल्मा व शाहीन के प्रयास भी सराहनीय रहे। इन्हें प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ हरगोविंद खुराना तथा जेनेटिक्स से संबंधित एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी में सभी की प्रतिभागिता हेतु जानकारी दी गई। लिंक समूह पर डाल दी गई है। यदि किसी को परेशानी हो तो लिंक के लिए समन्वयक से संपर्क कर सकता है। प्रतिभागियों से अपने अनुभव समाज व अन्य के साथ
साझा करने का आवाहन किया। अपने विकास को जान प्रतिभागी उत्साहित हुये।



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