बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, संघर्ष समिति के प्रस्ताव पर चर्चा

■ ऊर्जा मंत्री ने संघर्ष समिति के प्रस्ताव को सकारात्मक बताते हुए कहा- सही दिशा में बदलाव दिख रहा है

ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा की अध्यक्षता में आज विधान भवन के तिलक हाल में बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु हुई समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव(ऊर्जा), ऊर्जा निगमों के एमडी और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी सम्मिलित हुए। आज की बैठक में संघर्ष समिति द्वारा विगत 22 अक्टूबर 2020 को दिये गये सुधार प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा प्रारम्भ हुई जो कि अगली बैठक में भी जारी रहेगी। ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने आज की बैठक के समापन पर कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि सुधारों पर संघर्ष समिति ने बहुत सकारात्मक चर्चा की है और बदलाव स्पष्टतया सही दिशा में दिख रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि समीक्षा की अगली बैठक में भी संघर्ष समिति के प्रस्तावों पर चर्चा जारी रहेगी और संघर्ष समिति की चर्चा पूरी हो जाने के बाद पावर कारपोरेशन प्रबन्धन अपनी बात रखेगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि संघर्ष समिति और प्रबन्धन की चर्चा हो जाने के बाद सुधार की कार्य योजना तैयार कर सुधार के कार्यक्रम चलाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि आज सार्थक संवाद हुआ है और संवाद से ही समाधान निकलता है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि आज की चर्चा में संघर्ष समिति की ओर से रखे गये सभी प्र्रस्ताव उपभोक्ता उन्मुखी हैं ओर उपभोक्ता का हित ही हमारे लिये सर्वोपरि है।
संघर्ष समिति की ओर से प्रथम चरण की वार्ता में मा. ऊर्जा मंत्री जी के समक्ष अपना पक्ष प्र्रस्तुत करते हुए कहा गया कि विगत 06 अक्टूबर 2020 के उप्र सरकार/शासन एवं संघर्ष समिति के मध्य सम्पन्न वार्ता बैठक में बनी सहमतियों के क्रम में संघर्ष समिति ने प्रदेश भर में विभिन्न व्यवस्था सुधार गोष्ठियाँ सम्पन्न कराये, उप्र सरकार/शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन को व्यवस्था सुधार हेतु 22 अक्टूबर 2020 को सुझाव पत्र सौंपे गये परन्तु यह अत्यन्त दुर्भाग्य है कि उप्र का शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन आवश्यक कार्यवाही किये जाने की बात तो दूर रही उस सुझाव पत्र को संज्ञान में लेना भी उचित नहीं समझा। ऊर्जा मंत्री ने सरल हृदयता का भाव दर्शाते हुए सर्वप्रथम संघर्ष समिति के सुधार प्रस्तावों पर चर्चा किये जाने हेतु संघर्ष समिति को अपना पक्ष प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी जिस पर संघर्ष समिति ने प्रस्तावना प्र्रस्तुत करते हुए कहा कि उपभोक्ता देवो भवः एवं ऊर्जा क्षेत्र में सुधार संघर्ष समिति का प्रथम ध्येय है, ऊर्जा हानियों को घटाये जाने हेतु पटियाला मॉडल को लागू किया जाना निगम हित में बेहतर होगा। इस क्रम में अन्य पदाधिकारियों ने तर्कपूर्ण आँकड़ों के आधार पर पक्ष रखते हुए कहा कि बेहतर उपभोक्ता सेवा एवं लाइन हानियों को घटाकर अपेक्षित राजस्व वसूली का लक्ष्य प्राप्त किये जाने हेतु विभाग में मानव संसाधन नीतियों में व्यापक चिन्तन कर कार्य आवश्यकता के क्रम में मानकनुरूप कार्मिकों के नये पदों का सृजन एवं नियमित भर्तियां इत्यादि कराये जाने के साथ ही विभाग में सुधार के नाम पर बड़े पैमाने पर निजी संस्थाओं के माध्यम से कराये जाने से बिलिंग एवं अन्य कार्यों की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होने के साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है जिस पर नियंत्रण पाये जाने हेतु फ्रेन्चाईजीकरण व्यवस्था को शीघ्र समाप्त किये जाने की मांग को प्रबलतापूर्वक रखा गया एवं दक्ष संविदा कार्मिकों को तेलंगाना की भांति नियमित किये जाने की मांग की गयी।
समिति ने यह भी कहा कि बिलिंग एवं कलेक्शन व्यवस्था दुरूस्त किये बिना, उपभोक्ताओं के बेहतर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था किये बिना, कार्मिकों को प्रोत्साहन एवं कार्य का वातावरण दिये बिना ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ किये जाने की परिकल्पना व्यवहारिक रूप से सम्भव नहीं है।
संघर्ष समिति ने अपने पक्ष में कहा कि इन दुर्व्यवस्थाओं को दूर किये जाने एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाये जाने एवं सस्ती बिजली हर घर बिजली का लक्ष्य प्राप्ति हेतु मितव्ययी व्यवस्था मार्ग पर चलकर ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर उप्र राज्य विद्युत परिषद लि0 (UPSEB) का गठन किया जाये। संघर्ष समिति का पक्ष रखने का क्रम जारी रहा कि इसी मध्य मंत्री ने सम्बोधन करते हुए समिति के पदाधिकारियों को यह भी कहा कि आज की चर्चा उपभोक्ता हित पर केन्द्रित रही जो कि अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है।



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