सिंचाई विभाग की नहरों के लिए मुसीबत बने चूहा और केकड़ा

संजीव कुमार पांडेय (संवाददाता)

राजगढ़ । सिंचाई विभाग के लिए चूहा और केकड़ा मुसीबत साबित हो रहे है। जिले के विभिन्न स्थानों पर आए दिन टूट रही नहरों के संबंध में सिंचाई विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि नहरों को बंद कर दिए जाने से चूहा तटबंध में बिल बना कर घुस जाते हैं। जब नहरों का संचालन किया जाता है तो उसी बिल के चलते तटबंध टूट जाता है।

सूबे की सरकार प्रति वर्ष नहरों की मरम्मत एवं सिल्ट की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद आए दिन नहरों का तटबंध टूट जाने से किसानों की फसलों को भारी क्षति पहुंच रही है। बीते सप्ताह भर में दो स्थानों पर नहर टूट जाने से लगभग दो सौ बीघा गेहूं की फसल पानी में डूब जाने से नष्ट हो गई। बीते 29 दिसंबर को छानबे ब्लाक नर्रोइयां गांव में उमापुर लिफ्ट कैनाल की नहर टूट जाने से सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल पानी में डूब जाने से नष्ट हो गई थी। उसी के अगले दिन हलिया ब्लाक के ददरी गांव के पास अदवा बांध से संचालित नहर के टूट जाने से 60 बीघा से अधिक गेहूं की फसल पानी में डूब जाने से नष्ट हो गई। सिंचाई विभाग के सिरसी डिविजन से संचालित इस नहर की मरम्मत हाल ही में कराई गई थी। इसके बावजूद नहर टूट गयी। इस संबंध में जब सिंचाई विभाग के सिरसी डिविजन के सहायक अभियंता किसलय राय का कहना है कि चूहा व केकड़ा तटबंध में बिल करके क्षति पहुंचा देते हैं। जब नहर का संचालन किया जाता है तो उसी बिल से पानी निकलने के कारण तटबंध टूट जाता है।

यहीं नहीं इसी डिविजन के अधिशासी अभियंता पंकज पाणि शुक्ल भी अपने सहायक अभियंता की बातों पर सहमति जतायी। कहाकि जब नहरों को सिल्ट की सफाई के लिए काफी दिनों तक बंद कर दिया जाता है तब चूहा और केकड़ा सक्रिय हो जाते है। वहीं हाल ही में नहर के सिल्ट की सफाई और मरम्मत कराए जाने के संबंध में कहाकि सिल्ट की सफाई में नहरों के तटबंध की मरम्मत का कार्य नहीं कराया जाता है।



अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!