कोन क्षेत्र में एसडीएम की छापेमारी से स्थानीय प्रशासन की खुली पोल, कमियां छिपाने के लिए देते रहे अपनी दलील

पी0के0 विश्वकर्मा (संवाददाता)

– नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठा सवाल, आखिर बिना नम्बर की गाड़ी बार्डर कैसे पार की

कोन । जिले में अवैध खनन व ओवरलोड की समस्या कोई नया नहीं है । सरकार चाहे जिस किसी की भी रही हो अवैध खनन व ओवरलोड को लेकर जिला सोनभद्र हमेशा से बदनाम रहा है । योगी सरकार बनी तो लोगों को लगा कि इस समस्या से जिले को अब शायद निजात मिल जाएगा । लेकिन प्रशासन जितनी सख्ती दिखा रहा है खनन व परिवहन माफिया अपना पैंतरा लगातार बदल रहे हैं । जिलाधिकारी एस राज लिंगम ने अवैध परिवहन रोकने के लिए मुख्यालय पर चार मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में भारी भरकम टीम तक लगा दी, ताकि ओवरलोड परिवहन पर अंकुश लग सके । जिसका असर अब दिखने भी लगा है । लेकिन अवैध खनन व परिवहन माफिया प्रशासन के साथ लुका-छिपी का खेल शुरू कर दिया है और अपना रास्ता बदल कर अन्य राज्यों से बालू लाकर सोनभद्र में अवैध धंधे का खेल शुरू कर दिया है ।

जिसका ताजा उदाहरण कोन क्षेत्र में देखने को मिला जहां प्रशासन ने सोमवार की रात छापेमारी कर 16 ओवरलोड ट्रकों को धर दबोचा । जिसमें 14 गाड़ियां तो ओवरलोड के साथ बिना नम्बर की थी । छापेमारी के दौरान एसडीएम ओबरा खुद हैरान थे कि आखिर ये ट्रकें बॉर्डर क्रॉस कर यहां तक पहुंची कैसे ।

ओबरा एसडीएम के नेतृत्व में कई गयी इस छापेमारी की कार्यवाही के बाद भले ही अवैध परिवहन माफियाओं में हड़कम्प मच गया हो लेकिन इस कार्यवाही से क्षेत्रीय प्रशासन के ऊपर भी कई सवाल खड़े हो गए ।

सवाल यह उठता है कि यदि क्षेत्र में ओवरलोड परिवहन का खेल चल रहा था तो स्थानीय प्रशासन ने पहले इसकी जानकारी खनन व परिवहन विभाग समेत एसडीएम को क्यों नहीं दी । और वह भी दूसरे राज्यों का माल बिना नम्बर की गाड़ी के सोनभद्र में लाकर धंधा कर रहा है ।

क्षेत्र में बिना नम्बर की गाड़ियां इतनी बड़ी संख्या में बेखौफ चल रही हैं इस पर पहले कितनी बार एक्शन लिया गया यह तो जांच से स्पष्ट हो सकेगा । लेकिन जिस तरह मुखबीर की सूचना पर एसडीएम ओबरा प्रकाश चन्द्र द्वारा छापेमारी की गई और बड़ा खुलासा हुआ, यह इससे पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा क्यों नहीं किया गया ।

बड़ा सवाल यह भी है कि जब एसडीएम ओबरा प्रकाश चन्द्र छापेमारी कर रहे थे उसके पहले लगभग सभी ट्रकों के चालक ट्रक छोड़कर भाग चुके थे । इससे साफ है कि जहां एक तरफ ओवरलोड ट्रकें चलने की सूचना मुखबीर के माध्यम से एसडीएम व जिले की टीम को मिला उसी तरह ओवरलोड ट्रक चालकों को टीम द्वारा छापेमारी किये जाने की सूचना पहले ही मिल चुकी थी, जिसका नतीजा रहा कि छापेमारी के पहले ही ट्रक चालक मौके से फरार हो गए ।

बताया जा रहा है कि एसडीएम ओबरा प्रकाश चन्द्र चाहते थे कि सभी गाड़ियों को सीज कर दिया जाय और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो । मगर वहां मौजूद अन्य अधिकारियों की दिलचस्पी न दिखाए जाने से एसडीएम नाराज भी थे । परिवहन विभाग को तो 14 ट्रकों का नम्बर प्लेट ही नहीं मिला । जबकि स्थानीय पुलिस प्रशासन इस बात पर दलील देती रही कि आखिर ट्रक को टोचन कर थाने तक कैसे भेजा जाए । क्योंकि ओवरलोड माल होने की बजह से ट्रक को खींचकर ले जाना आसान नहीं था, लिहाजा ट्रकों पर जुर्माना के साथ पड़ोसी राज्य के खनन विभाग को परमिट की वैद्य होने की पुष्टि के लिए पत्र लिख दिया गया ।

बहरहाल इस छापेमारी की कार्यवाही के बाद कुछ भले ही कुछ दिनों के लिए अवैध ओवरलोड परिवहन का खेल थम जाय मगर परिवहन माफियाओं को भी पता है कि इस तरह की कार्यवाही कभी-कभार ही होती है और जब तक अंदरखाने में उनके लोग है तब तक उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता । इसीलिए एक कहावत बड़ी प्रचलित है कि जब साईंया भये कोतवाल तब डर काहे का ।



अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!