अनपरा में पत्रकार को धमकी देने का मामला पहुंचा प्रभारी मंत्री के सामने, तत्काल कड़ी कार्यवाही का मंत्री ने दिया निर्देश

रमेश यादव (संवाददाता)

– बड़ा सवाल, चुर्क में नक्सली के नाम पर पत्र देने वाला गिरफ्तार हुआ तो फोन पर नक्सली सम्बन्ध बताने वाला गिरफ्त से बाहर क्यों

– पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठा सवाल

– आखिर पुलिस ने अब तक आरोपी से पूछताछ क्यों नहीं की

– पत्रकार का आरोप, स्थानीय पुलिस ने आज तक नहीं दिया कोई रिस्पांस

दुद्धी । गुरुवार को दो दिन के दौरे पर आए जिले के प्रभारी व बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने पहले दिन ही जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ कानून व्यवस्था की समीक्षा की । समीक्षा बैठक से निकले तो कलेक्ट्रेट परिसर में ही घोरावल थाने का एक प्रकरण लेकर महिला पहुंची और अपने व अपने पति के साथ हुए घटना को लेकर न्याय की गुहार लगाई थी । जिसमें प्रभारी मंत्री ने तत्काल एसपी को इस मामले में कार्यवाही करने का निर्देश दिया था ।
कल जब मंत्री जी जब कानून व्यवस्था की बैठक कर रहे थे तो शायद उन्हें सब कुछ बेहतर बताया गया होगा । लेकिन आज जब प्रभारी मंत्री दुद्धी कार्यक्रम में पहुंचे तो वहां भी कानून व्यवस्था का मामला पत्रकारों ने उठाते हुए बताया कि एक निजी आउटसोर्सिंग कंपनी के मैनेजर पत्रकार को ही जान से मारने की धमकी दे रहा है । पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री को बताया कि कम्पनी का मैनेजर खुद को नक्सली समेत कई प्रतिबंधित संगठन से सम्बन्ध होने की बात भी कर रहा है । इतना सुनते ही प्रभारी मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी बेहद खफा हो गए । उन्होंने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को तत्काल इस मामले में धारा बढ़ाते हुए कार्यवाही करने का निर्देश दिया ।

आपको बतादें कि अनपरा थाना अंतर्गत 23 नवंबर 20 20 को देर रात एनसीएल बिना कोयला परियोजना में कार्यरत एक आउटसोर्सिंग कंपनी के मैनेजर द्वारा फोन पर एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार विक्रमजीत सिंह सोढ़ी को जान से मारने की धमकी दी थी । पत्रकार विक्रमजीत सिंह सोढ़ी ने बताया कि फोन पर मैनेजर खुद को नक्सलियों व प्रतिबंधित संगठन से सम्बन्ध होने की बात कह रहा था । विक्रमजीत सिंघने बताया कि इस मामले में वह अनपरा थाने में तहरीर के साथ ऑडियो की सीडी भी दिया था लेकिन पुलिस ने महज हल्की धारा आईपीसी की धारा 504, 506 के तहत मामला दर्ज किया।उन्होंने बताया कि इतने गंभीर प्रकरण होने के बाद भी पुलिस न सिर्फ हल्की धारा में मामला दर्ज किया बल्कि उसकी गिरफ्तारी का भी कोई प्रयास नहीं किया। पत्रकार का कहना है कि वह न्याय व गिरफ्तारी के लिए कई बार थाने गया लेकिन कोई भी रिस्पांस नहीं मिला । जिसकी वजह से उन्होंने आज मंत्री के सामने ज्ञापन सौंप कर न्याय की गुहार लगायी है ।

पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर यह कोई नया मामला नहीं है । लेकिन सवाल यह उठता है कि जब जिला नक्सल प्रभावित है और एक सख्स खुद को नक्सलियों से सम्बन्ध होने की बात कह रहा है तो आखिर पुलिस ने अब तक उसे बुलाकर पूछताछ क्यों नहीं की । क्या पुलिस किसी प्रभाव में है या फिर नक्सल से जुड़े मामले को हल्के में ले रही है ।

बहरहाल प्रभारी मंत्री ने घोरावल का मामला हो या फिर अनपरा का, जिस तरह से तत्काल निस्तारण करने का निर्देश दिया है, यही काम यदि जिले के उच्चाधिकारी पहले किये होते तो शायद इस तरह के मामले मंत्री के सामने ही नहीं आते ।



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