ग्राम पंचायतों का बजट खर्च करने की होड़, खूब लग रहे डोंगल

रमेश यादव ( संवाददाता )

– 25 दिसम्बर 2020 को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल हो रहा है पूरा,उसके पहले बजट निकालकर अधूरे कार्य पूर्ण कराने की कोशिश

– आपूर्तिकर्ताओ एवं अन्य फर्मो के नाम से धन निकासी में जुटे ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी

दुद्धी।पंचायत चुनाव की आहट तथा 25 दिसम्बर को समाप्त हो रहे ग्राम प्रधान के कार्यकाल से पहले अवशेष बजट को खर्च करने की ग्राम प्रधानों में होड़ मची है इसलिए विगत माह की अपेक्षा ब्लाकों में दिसम्बर में लगभग समस्त ग्राम प्रधानों की मौजूदगी देखी जा रही हैं।शासन ने पहले ही एलान कर दिया है कि 25 दिसम्बर के ग्राम पंचायतों के वितीय अधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे।शासन के फरमान के सक्रिय हुए ग्राम पंचायतों में अपनी अवशेष बजट को जैसे तैसे खत्म करने की होड़ सी मच गई और ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत के आपूर्तिकर्ता या अन्य फर्मो के नाम भुगतान कराने में जुट गए इसलिए पिछले कई महीनों की अपेक्षा ग्राम पंचायत का बजट इस नवम्बर और दिसम्बर में तेजी से खर्च किया गया चाहे जमीनी हकीकत भले ही अलग क्यों न हो।अभी हाल ही में लगभग सभी ग्राम पंचायतों में एक – एक सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं या बनवाए जा रहे हैं जिसकी लागत लगभग 6 लाख रुपये से ऊपर बताई जा रही हैं।गांवों में सामुदायिक शौचालय के निर्माण में भी ग्राम प्रधानों एवं ग्राम विकास अधिकारियों ने जमकर मनमानी करते हुए ठेके तक दे दिए ताकि बजट जल्द खर्च किया जा सके लेकिन दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र में देखा जाए तो अभी भी लगभग 50 प्रतिशत सामुदायिक शौचालय ही पूर्ण रूप से कम्प्लीट हो सके हैं इसके अलावा कई गांवों में डोर लेबल तो कई गांवों में ढलाई कर छोड़ दिया गया है।ऐसे में 25 के बाद उसको पूर्ण कराने की जिम्मेदारी ग्राम विकास अधिकारियों के कंधों पर होगा और वह कितनी ईमानदारी से कार्य पूर्ण कराते हैं यह तो भविष्य ही तय करेगा।
बता दें कि पिछली पंचवर्षीय चुनाव 2015 में हुए थे और 25 दिसम्बर 2015 को ग्राम प्रधानों ने शपथग्रहण किया था।साल 2020 के लगभग शुरुआत से ही देश में फैले कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव समय पर नही हो सकें है ऐसे में अब उम्मीद है कि फरवरी के अंत तथा मार्च के पहले पखवाड़े में पंचायत चुनाव सम्पन्न कराए जा सकते हैं।
ग्राम प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष हरिशंकर यादव ने कहा कि शासन को जब तक आचार संहिता नही लगती तब तक गांवों में विकास कार्य कराने का अवसर देना चाहिए जिसकी मांग अखिल भारतीय प्रधान संघ कर रहा है।क्योंकि चुनाव जब मार्च में कराए जाएंगे तो ऐसे में माना जा रहा है कि फरवरी में आचार संहिता लग सकती हैं इस लिहाज से ग्राम प्रधानों को लगभग दो माह तक सिर्फ रबड़ का मुहर बनकर रहना पड़ेगा।इसलिए संगठन की तरफ से शासन से आचार संहिता लगने तक गांवों में विकास कार्य कराने की मांग की जा रही है।



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